खास बातें
- देश की खराब अर्थव्यवस्था और महंगाई से रिजर्व बैंक पर दरों में कटौती का दबाव बढ़ा था लेकिन आरबीआई ने सीआरआर को 4.75 प्रतिशत पर ही रखा है।
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ने सोमवार को निर्यात ऋण पुनर्वित्त (ईसीआर) सुविधा के तहत बैंकों को रुपए में दिए गए कुल निर्यात कर्ज के 15 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत के बराबर ऋण देने का निर्णय किया। इससे बैंकों के पास निर्यात क्षेत्र के लिए कर्ज देने को 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी सुलभ होगी। बैंकों को यह सुविधा रिजर्व बैंक की रेपो दर पर मिलती है जो इस समय 8 प्रतिशत है।
मध्य तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘निर्यात क्षेत्र को रिण प्रवाह बढ़ाने के मकसद से अनुसूचित बैंकों के लिये (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) ईसीआर सुविधा की सीमा बैंकों के निर्यात ऋण के 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत का निर्णय किया गया है। यह सुविधा 30 जून 2012 से लागू होगी।’’ शीर्ष बैंक ने कहा कि इससे बैंकों को 30,000 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त नकदी मिलेगी। ईसीआर पर ब्याज दर रेपो दर के बराबर है जो फिलहाल 8 प्रतिशत है। रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंक 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज ले सकेंगे।
मौद्रिक नीति में कर्ज लेने की दरों में भी 0.25 अंको की कटौती की संभावना जताई जा रही थी। शनिवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी उम्मीद जताई थी कि आम लोगों और उद्योग जगत की चिंताओं का रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति में ध्यान रखेगा। साथ ही उन्होंने भी दरों में कटौती के संकेत दिए थे। लेकिन आज घोषित नीति में इसका असर दिखाई नहीं दिया।
ऐसा करने के पीछे आरबीआई की दलील है कि कर्ज सस्ता करने से महंगाई बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए उसकी यह प्राथमिकता है कि महंगाई पर काबू रखा जाए।