खास बातें
- भारतीय रुपया कमजोर होकर 54 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने के बाद अंत में भारतीय रिजर्व बैंक की ‘मदद’ से सुधरकर 53.79 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
मुंबई: भारतीय रुपया कमजोर होकर 54 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने के बाद अंत में भारतीय रिजर्व बैंक की ‘मदद’ से सुधरकर 53.79 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
स्थानीय मुद्रा में सुधार के लिए केंद्रीय बैंक ने भारी मात्रा में डॉलर की बिकवाली की, जिससे रुपया सुधरा।
चालू खाते के खाते जैसी अर्थव्यवस्था की आधारभूत कमजोरियों की वजह से पिछले कुछ सत्रों से रुपये में लगातार गिरावट आ रही है। अंतर बैंक विदेशी विनियम बाजार में कारोबार शुरू होने के तत्काल बाद रुपया 54 के स्तर को लुढक कर 54.05 प्रति डॉलर के स्तर तक नीचे चला गया। इसके तुरंत बाद यह किसी एक दिन के दूसरे सबसे निचले स्तर 54.15 प्रति डॉलर तक चला गया।
समझा जाता है कि बाद में रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की वजह से रुपया सुधरना शुरू हुआ। अंत में यह पिछले बंद स्तर से 17 पैसे का सुधार दर्शाता हुआ 53.79 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पहले 15 दिसंबर, 2011 को कारोबार के दौरान रुपये ने 54.32 डॉलर का ऐतिहासिक निचला स्तर छुआ था।
इंडियन ओवरसीज बैंक के महाप्रबंधक (ट्रेजरी) टीएस श्रीनिवासन ने कहा, ‘केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप की वजह से रुपये में सुधार आया। रुपये के 54 डॉलर के पार खुलने के बाद बाजार में डॉलर की भारी बिकवाली का दौर चला।’
हालांकि, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि रुपये में तेजी का यह सिलसिला अस्थायी है, क्योंकि आधार अभी कमजोर है। ऐसे में अगले 12 माह में रुपया 55 से 58 प्रति डॉलर के स्तर तक नीचे जा सकता है।