यह ख़बर 24 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

आरबीआई की दरों में बदलाव न होने से बाजार रहे सपाट

खास बातें

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा गत सप्ताह सोमवार को मध्य तिमाही मौद्रिक नीति की घोषणा में दरों को अपरिवर्तित रखे जाने के कारण बाजार से उत्साह गायब रहा और देश के शेयर बाजारों में मामूली तेजी का रुख रहा।
मुम्बई:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा गत सप्ताह सोमवार को मध्य तिमाही मौद्रिक नीति की घोषणा में दरों को अपरिवर्तित रखे जाने के कारण बाजार से उत्साह गायब रहा और देश के शेयर बाजारों में मामूली तेजी का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी पिछले शुक्रवार के मुकाबले इस शुक्रवार को 0.13 फीसदी तेजी के साथ बंद हुए।

बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आलोच्य अवधि में 22.68 अंकों की तेजी के साथ 16,972.51 पर बंद हुआ। सेंसेक्स पिछले शुक्रवार को 16,949.83 पर बंद हुआ था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी आलोच्य अवधि में 7.00 अंकों की तेजी के साथ 5,146.05 पर बंद हुआ। निफ्टी पिछले शुक्रवार को 5,139.05 पर बंद हुआ था।

आलोच्य अवधि में बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में लगभग 0.9 फीसदी की तेजी रही। मिडकैप 51.71 अंकों की तेजी के साथ 6,010.21 पर और स्मॉलकैप 56.06 अंकों की तेजी के साथ 6,407.50 पर बंद हुआ।

बीएसई के 13 में से नौ सेक्टरों में इस सप्ताह तेजी रही। पूंजीगत वस्तु (2.21 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (1.97 फीसदी), बिजली (1.60 फीसदी), वाहन (1.35 फीसदी) और सार्वजनिक कम्पनियां (1.33 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

बीएसई में गिरावट वाले चार शेयरों में रहे सूचना प्रौद्योगिकी (1.77 फीसदी), प्रौद्योगिकी (1.45 फीसदी), धातु (0.48 फीसदी) और बैंकिंग (0.22 फीसदी)।

इससे पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1.4 फीसदी तेजी रही थी। शेयर बाजारों पर पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक की 18 जून को होने वाली मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में कटौती की प्रबल सम्भावना का सकारात्मक असर देखा गया था। लेकिन रिजर्व बैंक ने इस सप्ताह सोमवार को दरों को पुराने स्तर पर बनाए रखा, जिसके कारण बाजार में मायूसी छा गई और सोमवार के कारोबार में बाजार में गिरावट रही।

इस सप्ताह बाजार पर अन्य कई बातों का भी असर पड़ा।

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने सोमवार को भारत के आर्थिक परिदृश्य को स्थिर से घटाकर 'नकारात्मक' कर दिया और कहा कि यदि देश की शासन व्यवस्था और नीति निर्माण में सुधार नहीं हुआ तो देश के विकास का परिदृश्य खराब हो सकता है।

फिच ने कहा कि परिदृश्य में संशोधन किए जाने का मतलब यह है कि यदि संरचनागत सुधार नहीं किए गए तो मध्यकालीन से दीर्घकालीन विकास की सम्भावना धीरे-धीरे खराब हो सकती है।

फिच ने अपने बयान में कहा, "भारत को सुस्त विकास और उच्च महंगाई दर की विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।"
रेटिंग एजेंसी ने साथ ही 2012-13 में महंगाई दर 7.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया, जो पहले जताए अनुमान से अधिक है।

फिच रेटिंग्स ने इसके बाद बुधवार को 11 भारतीय वित्तीय संस्थानों की 'बीबीबी-' लांग टर्म (एलटी) फॉरेन करेंसी (एफसी) इशुअर डिफॉल्ट रेटिंग (आईडीआर) के भावी परिदृश्य में संशोधन कर इसे स्थिर से नकारात्मक कर दिया। एजेंसी ने हालांकि रेटिंग को बरकरार रखा।

शेयर बाजारों में गुरुवार को आखिरी घंटे में तेजी का रुख रहा। विश्लेषकों और ब्रोकरों के मुताबिक निवेश बैंक जेपी मोर्गन द्वारा भारतीय शेयरों का दर्जा 'न्यूट्रल' से बढ़ाकर 'ओवरवेट' किए जाने के कारण बाजार तेजी के साथ बंद हुए।

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राष्ट्रीय मुद्रा रुपया शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन डॉलर के मुकाबले रिकार्ड निचले स्तर तक पहुंचने के बाद प्रति डॉलर लगभग 57 पर बंद हुआ। रुपये ने शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 57.33 के रिकार्ड नए निचले स्तर को छुआ। यह गुरुवार को भी 56.57 के रिकार्ड निचले स्तर तक पहुंचा था।