यह ख़बर 26 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

आरबीआई के 'कदम' से सहम गया बाजार

खास बातें

  • रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में अनुमान से अधिक बढ़ोतरी किए जाने से वाहन, रीयल्टी और बैंकिंग शेयरों में जबर्दस्त बिकवाली हुई।
मुंबई:

मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में अनुमान से अधिक बढ़ोतरी किए जाने से वाहन, रीयल्टी और बैंकिंग शेयरों में जबर्दस्त बिकवाली हुई जिससे बीएसई सेंसेक्स 353 अंक तक टूट गया। 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार में तेजी का रुख रहा। लेकिन ब्याज दरें बढ़ाए जाने की घोषणा के कुछ मिनटों में यह टूटने लगा और 353.07 अंक की गिरावट के साथ 18,518.22 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले सेंसेक्स ने यह स्तर 20 जून को देखा था। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 105.45 अंक टूटकर 5,574.85 अंक पर बंद हुआ। रिजर्व बैंक ने 2011-12 के लिए पहली मौद्रिक नीति की समीक्षा में रेपो और रिवर्स रेपो दरें आधा-आधा प्रतिशत तक बढ़ा दी। बाजार को रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने की उम्मीद थी। साथ ही, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के अंत तक मुद्रास्फीति का अनुमान भी पहले के छह प्रतिशत के मुकाबले बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। बिकवाली की मार सबसे अधिक एलएंडटी, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी पर पड़ी। बाजार अनुमान से बेहतर नतीजे पेश करने वाली आरआईएल का शेयर भी बिकवाली की मार से नहीं बच सका। ब्रोकरों ने कहा कि बाजार नीतिगत दरों में चौथाई प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद किए बैठा था, लेकिन आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी ने बाजार को चकित कर दिया।


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