खास बातें
- रिजर्व बैंक ने मंगलवार को होने वाली मौद्रिक एवं ऋण नीति की पहली तिमाही समीक्षा में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत दिया है।
मुंबई: रिजर्व बैंक ने मंगलवार को होने वाली मौद्रिक एवं ऋण नीति की पहली तिमाही समीक्षा में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत दिया है। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि में सुस्ती के बावजूद मुद्रास्फीति की ऊंची दर को काबू में लाने के लिये ऋण नीति और सख्त करने की जरूरत है। मौद्रिक नीति की पूर्वसंध्या पर जारी वृहत आर्थिक एवं मौद्रिक विकास रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने कहा है, मुद्रास्फीति को काबू में रखने के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए इसके खिलाफ मौजूदा उपायों को जारी रखने की जरूरत है, हालांकि इसमें आर्थिक वृद्धि में सुस्ती का जोखिम भी है। रिजर्व बैंक ने कहा, जब तक मुद्रास्फीति के रिजर्व बैंक के संतोषजनक क्षेत्र के आसपास आने के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई देंगे, तब तक बैंक की सख्त मौद्रिक उपायों पर जोर देता रहेगा। उल्लेखनीय है कि जून में मुद्रास्फीति दर 9.44 प्रतिशत रही है। केन्द्रीय बैंक ने वित्त वर्ष की समाप्ति पर इसके 6 प्रतिशत तक नीचे आने का लक्ष्य रखा है। पिछले 15 महीनों के दौरान केन्द्रीय बैंक ने नीतिगत दरों (रेपो और रिवर्स रेपो) में 10 बार वृद्धि की है। इस दौरान रेपो दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 6.5 प्रतिशत पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ने कहा है कि मानसून, वैश्विक उपभोक्ता मूल्य और यूरोक्षेत्र का संकट इन सभी में कोई भी बदलाव आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के स्तर को बदल सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा, मानसून के सामान्य से आगे बढ़ने, वैश्विक बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में गिरावट और यूरोक्षेत्र संकट का संकट समाप्त होने से मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि की भविष्यवाणियां में बदलाव आ सकता है।