यह ख़बर 18 जुलाई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

यात्रियों के सफर को संगीतमय बनाएगी भारतीय रेल

खास बातें

  • यात्रियों के सफर को संगीतमय बनाने के लिए रेलवे ने राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों के डिब्बों में शास्त्रीय संगीत एवं धुन सुनाने की योजना बनाई है।
नई दिल्ली:

यात्रियों के सफर को संगीतमय बनाने के लिए रेलवे ने राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों के डिब्बों में शास्त्रीय संगीत एवं धुन सुनाने की योजना बनाई है।

योजना के मुताबिक शास्त्रीय संगीत की धुनों के लिए उस्ताद बिस्मिल्ला खान, टीएन राजरत्नम् पिल्लई और पंडित पन्नालाल घोष जैसे महान संगीतकारों का चयन किया गया है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों में यात्रियों के मनोरंजन के लिए इन उस्तादों की धुनों को सार्वजनिक घोषणा प्रणाली के जरिए सुनाया जाएगा।

रेलवे ने ऐसे उस्तादों के संगीत के लिए ऑल इंडिया रेडियो को अपना स्रोत बनाया है। रेलवे मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, हमने ऑल इंडिया रेडिया की लाइब्रेरी से ऐसे चुनिंदा संगीत एवं धुनों को मांगा है। रेडियो ने हमें राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों में इन धुनों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा उस्ताद बिस्मिल्ला खान का शहनाई वादन, उस्ताद अलाउद्दीन खान का सरोद वादन और द्वाराम वेंकटस्वामी नायडू के वायलिन पर आधारित दुर्लभ राग, टीएन राजरत्नम पिल्लई का नादस्वरम और टीआर महालिंगम एवं पन्नालाल घोष के बांसुरी वादन को भी यात्रियों को सफर के दौरान सुनाया जाएगा।

इसके साथ ही उस्ताद अलमान जान का थिरकवा, डागर बंधुओं का ध्रुपद गायन, निखिल बनर्जी का सितार वादन एवं राधिका मोहन मित्रा एवं शरन रानी बाकलीवाल के सरोद वादन को भी शामिल किया गया है।

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मंत्रालय ने सभी संभागीय रेलवे कार्यालयों को सफर के मुताबिक ही संगीत सुनाने संबंधी निर्देश भी जारी किए हैं। रेलवे अधिकारी ने बताया कि हम दिल्ली से चलने वाली शताब्दी ट्रेन में लाइव टीवी की सुविधा मुहैया कराने के बारे में प्रयास कर रहे हैं।