यह ख़बर 28 जनवरी, 2014 को प्रकाशित हुई थी

रघुराम राजन ने फिर किया हैरान, रेपो रेट में की चौथाई फीसदी की वृद्धि, लोन हो सकते हैं महंगे

नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को एक आश्चर्यजनक कदम के तहत अपनी प्रमुख ऋण दर - रिपर्चेज दर - यानि रेपो रेट में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद माना जा रहा है कि सभी वाणिज्यिक बैंक अब अपनी ऋण दरें बढ़ा देंगे। आरबीआई ने हालांकि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कोई बदलाव नहीं किया है, और उसे चार प्रतिशत पर बरकरार रखा है।

रेपो दर, जिस पर वाणिज्यिक बैंक सीमित अवधि के लिए रिजर्व बैंक से ऋण लेते हैं, 7.75 प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत कर दी गई है, जिसके कारण रिवर्स रेपो दर, जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों से सीमित अवधि के लिए उधारी लेता है, 6.75 प्रतिशत से बढ़कर स्वत: सात प्रतिशत हो गई।

आरबीआई ने मंगलवार को मौजूदा कारोबारी साल की मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही की समीक्षा की घोषणा की, जो पिछले वर्ष सितंबर में रघुराम राजन द्वारा गवर्नर पद संभाले जाने के बाद चौथी समीक्षा है।

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जानिए, क्या हैं रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर...?
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उल्लेखनीय है कि मुद्रास्फीति में सुधार के बावजूद हाल ही में एनडीटीवी द्वारा कराए गए एक पोल के दौरान अधिकतर अर्थशास्त्रियों का मानना था कि केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख दरों को अपरिवर्तित रखेगा। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई दर दिसंबर में 6.16 फीसदी थी। उपभोक्ता महंगाई दर दिसंबर में 9.87 फीसदी थी।


सोमवार को दुन एंड ब्रैडस्ट्रीट के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा था, हम नीतिगत दरों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं करते हैं। हाल में कुछ नरमी के बाद भी महंगाई दर के बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। उन्होंने कहा था, महंगाई दर आरबीआई के सुविधाजनक स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है, इसलिए दरों में कटौती की कोई उम्मीद नहीं है।

आरबीआई ने दिसंबर की नीति समीक्षा में दरों को पुराने स्तर पर बरकरार रखा था, और उस समय रघुराम राजन ने स्पष्ट किया था कि भविष्य में नीतिगत फैसले की दिशा महंगाई और खासकर खाद्य तथा प्रमुख उद्योगों की महंगाई के रुझानों से तय होगी।

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फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की पूर्व अध्यक्ष और एचएसबीसी इंडिया की राष्ट्रीय प्रमुख नैना लाल किदवई ने भी कहा था कि आरबीआई से इस बार नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है।