खास बातें
- वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट का कारण जिंसों की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव है।
नई दिल्ली: वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट का कारण जिंसों की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव है। उन्होंने कहा कि साथ ही कई एशियाई देशों में भुगतान संतुलन की बिगड़ती स्थिति से भी मुद्रा पर दबाव पड़ रहा है।
मुखर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘चीन को छोड़कर कई एशियाई देशों में भुगतान संतुलन दबाव में है जिससे मुद्रा के मूल्य में कमी हो रही है।’’ एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के बोर्ड ऑफ गवर्नर की 45वीं सालाना बैठक में भाग लेने यहां आए मुखर्जी ने कहा कि रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स द्वारा देश की साख की रेटिंग घटाए जाने के मद्देनजर भारतीय अर्थव्यवस्था की कुछ बुनियादी तत्वों को दुरुस्त करना होगा। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया।
पिछले कुछ महीने में भारत की मुद्रा के मूल्य में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे कच्चे तेल समेत कुल आयात असर पड़ा है। तेल का आयात बिल बढ़ने से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का बोझ बढ़ा है क्योंकि वह बढ़ी हुई कीमत का भार उपभोक्ताओं पर हस्तांरित नहीं कर पा रही हैं।
सब्सिडी का बोझ बजटीय लक्ष्य 1.8 लाख करोड़ रुपये से पार हो जाने की आशंका को देखते हुए वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने देश की साख की रेटिंग घटा दी है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चालू खाते के घाटे को लेकर चिंता जताई है। वित्त वर्ष 2011-12 में चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.5 से चार प्रतिशत रहने की संभावना है। भारत की सरकारी साख की रेटिंग घटाए जाने के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि अर्थव्यवस्था के कुछ बुनियादी तत्वों को दुरुस्त करना होगा हालांकि उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि सरकार क्या विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि चूंकि संसद सत्र में है, अत: घरेलू मुद्दों पर यहां चर्चा नहीं किया जा सकता।
मुखर्जी के अनुसार चुनौती का प्रमुख क्षेत्र यूरोजोन तथा जापान है क्योंकि यह विकासशील देशों की वस्तुओं लिए बड़े बाजार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जब तक जापान तथा यूरोप में पुनरुद्धार तेजी से नहीं होता इसका प्रभाव होगा। यूरो क्षेत्र में संकट का असर पड़ने की आशंका है।’’ वित्त मंत्री एक साल के लिए एडीबी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता संभालेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की तुलना में एशियाई क्षेत्र अभी भी अच्छा कर रहे हैं।
मुखर्जी ने कहा, ‘‘हम विश्व अर्थव्यवस्था की समीक्षा करेंगे। एशियाई क्षेत्र का विश्व अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।’’ भारत अगले वर्ष नई दिल्ली में एडीबी की सालाना बैठक का आयोजन कर रहा है। एडीबी बैंक के अध्यक्ष हारूहिको कुरोदा के अनुसार एशियाई अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर इस साल 6.9 प्रतिशत तथा अगले साल 7.3 प्रतिशत रहेगी।