यह ख़बर 07 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'ईंधन कीमतों में आधी-अधूरी वृद्धि से दबाव बरकरार'

खास बातें

  • सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप उनसे जोड़े जाने पर जोर दिया है।
New Delhi:

सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप उनसे जोड़े जाने पर जोर दिया है। सरकार ने चेताया है कि घरेलू बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में आधी-अधूरी वृद्धि से इन पर सब्सिडी बढ़ेगी जिसका असर मुद्रास्फीति पर भी होगा। वित्तमंत्रालय के यहां जारी वक्तव्य में वित्तमंत्री के हवाले से कहा है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दाम की भरपाई घरेलू बाजार में इनके मूल्य में आधी अधूरी वृद्धि के जरिए किए जाने से बढ़ती मांग पर अधिक सब्सिडी के रूप में सामने आएगी और इससे मुद्रास्फीति पर भी दबाव बढ़ेगा। मुखर्जी बिजनेस टुडे के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उल्लेखनीय है कि मई में सकल मुद्रास्फीति 9.06 प्रतिशत पर रही है जबकि 18 जून को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति कुछ घटकर 7.78 प्रतिशत पर आ गई। सरकार ने पेट्रोल के दाम तो नियंत्रण मुक्त कर दिए हैं, लेकिन हाल में की गई वृद्धि के बावजूद डीजल, केरोसिन और घरेलू रसोई गैस पर तेल कंपनियां नुकसान में हैं। इनके दाम अभी भी सरकार के प्रशासनिक मूल्य नियंत्रण में हैं।


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