यह ख़बर 29 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'वैश्विक पूंजी का भारत में हो सकता है प्रवाह'

खास बातें

  • प्रणब ने कहा कि यदि भारत अपने उच्च विकास दर को लगातार कायम रखे तो वैश्विक अस्थिरता के कारण पूंजी का प्रवाह भारत की ओर हो सकता है।
नई दिल्ली:

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि यदि भारत अपने उच्च विकास दर को लगातार कायम रखे तो वैश्विक अस्थिरता के कारण पूंजी का प्रवाह भारत की ओर हो सकता है। मुखर्जी ने भारतीय आर्थिक सेवा के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा, "हम वैश्विक स्थायित्व का स्रोत हो सकते हैं और अस्थिर वैश्विक पूंजी के लिए एक स्थायी ठिकाना हो सकते हैं।" उन्होंने कहा कि इससे विकास की गति और तेज हो जाएगी और विकास को गरीबों तक ले जाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा भारत में बढ़ता जा रहा है और वैश्विक नीति बनाने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुखर्जी ने कहा कि अकेले सरकार ही हालांकि सब कुछ नहीं कर सकती। सरकार का काम है एक माहौल बनाना, जहां लोग अधिक सक्षम होकर काम करें और अपना अधिक से अधिक भला करें। मुखर्जी ने कहा कि 1990 के बाद से किये जा रहे आर्थिक सुधार में नीति निर्माण के बुनियादी आधार में काफी बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों का केंद्र सरकार से बाहर के समूहों की ओर खिसक रहा है। इसे देखते हुए नीतियों में अधिक पारदर्शिता अपनाने की जरूरत है और विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों तथा सरकार के विभिन्न स्तरों में बेहतर तालमेल की जरूरत है।


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