यह ख़बर 28 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

पांच से छह फीसदी मुद्रास्फीति अनुकूल : मुखर्जी

खास बातें

  • वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगर मुद्रास्फीति को पांच से छह प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा जा सके तो यह अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल स्थिति होगी।
वाशिंगटन:

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगर मुद्रास्फीति को पांच से छह प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा जा सके तो यह अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल स्थिति होगी। मुखर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि सरकार तथा रिजर्व बैंक के तमाम प्रयासों के बावजूद मुद्रास्फीति नौ प्रतिशत के आसपास मंडरा रही है। मुखर्जी ने भारत तथा अमेरिका के उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मुद्रास्फीति के स्वीकार्य तथा वहनीय स्तर की व्याख्या करना कठिन है। लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था में हमारा मानना है कि अगर हम मुद्रास्फीतिक दबाव को 5 से 6 प्रतिशत के बीच रख पाते हैं तो यह आदर्श होगा। परंतु, हम 6 से 6.5 प्रतिशत में भी काम चला सकते हैं।' हालांकि, उन्होंने कहा कि इस साल मुद्रास्फीति कुछ अधिक रहेगी। कुल मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 9.06 प्रतिशत हो गई जिससे बढ़ती कीमतों का असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ने की आशंका है। मुखर्जी भारत-अमेरिका आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) तथा वाशिंगटन स्थित शोध संस्थान ब्रुकिंग इंस्टीट्यूट ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुद्रास्फीति स्तर वैश्विक स्तर पर जिंसों की ऊंची कीमत के कारण है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति कृषि मोर्चे पर आपूर्ति बाधाओं के कारण नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य पदार्थ एवं ईंधन समेत जिंसों की ऊंची कीमत से समस्या उत्पन्न हो रही है। 


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