प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा, "यह मानने का कोई कारण नहीं है कि हम पहाड़ से नीचे की तरफ लुढ़क रहे हैं और सामने 1991 जैसे हालात हैं।"
मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के पास अभी करीब 280 अरब डॉलर विदेशी पूंजी भंडार है, जिससे सात महीने तक आयात का खर्च उठाया जा सकता है।
वर्ष 1991 में देश के पास तीन अरब डॉलर का विदेशी पूंजी भंडार रह गया था, जिससे सिर्फ तीन सप्ताह के आयात का खर्च उठाया जा सकता था और देश को आयात बिल का भुगतान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास सोना गिरवी रखने को बाध्य होना पड़ा था।
मनमोहन सिंह ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मौजूदा कारोबारी साल में करीब 5.5 फीसदी रह सकती है। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि मौजूदा कारोबारी साल में विकास दर 5.5 फीसदी रहेगी।"
पिछले कारोबारी साल में देश की विकास दर पांच फीसदी थी, जो एक दशक का निचला स्तर था। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस साल विकास दर तेज नहीं होगी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, विकास दर मौजूदा कारोबारी साल की पहली तिमाही में घटकर 4.4 फीसदी दर्ज की गई, जो चार वर्ष से अधिक समय का निचला स्तर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बाहरी कारणों से रुपये में हो रही गिरावट चिंताजनक है, लेकिन पूंजी नियंत्रण जैसी कोई बात नहीं होगी। भारत एक खुली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने कहा, "हमें सोने के प्रति अतिशय मोह घटाना होगा। पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग कम करना होगा और निर्यात बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे।"
मनमोहन ने कहा कि रुपये में गिरावट कुछ हद तक लाभकारी भी है, क्योंकि इससे निर्यात प्रतिस्पर्धी बनता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन को धीमे-धीमे खत्म करने का संकेत मिलने के बाद मई से रुपये में 20 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले दो दशकों से भारत एक खुली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और इसका इसे लाभ भी मिला है। इस नीति से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता। मैं इस सदन और पूरी दुनिया को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार नियंत्रण के बारे में नहीं सोच रही है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और भारतीय रिजर्व बैंक तथा सरकार दोनों ही महंगाई दूर करने के उपाय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा कम करने की भी कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "घाटा कम करने का अनुकूल तरीका यह है कि सोच-विचार कर खर्च कीजिए, खासकर उन सब्सिडियों पर जो गरीबों तक नहीं पहुंच पाती हैं।" उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से भी बेहतर नीति पर चलने में मदद करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, "अब तक आसान सुधार किए जा चुके हैं। अधिक कठिन सुधार के लिए हमें राजनीतिक आम सहमति की जरूरत है। मैं सभी राजनीतिक पार्टियों से अनुरोध करता हूं कि देश को स्थिर विकास के पथ पर बनाए रखने के लिए काम करें और इसमें सरकार का साथ दें।"