नई दिल्ली: भारतीय तेल कंपनियों को अभी तक ईरान से जो कच्चा तेल सस्ते में मिलता था, वो अब नहीं मिल पाएगा, क्योंकि 2013 से ईरान पर लगे प्रतिबंध खत्म हो गए हैं। इन्हीं प्रतिबंधों की वजह से ईरान, भारत को देने वाले तेल का भाड़ा नहीं लेता था, क्योंकि अब तक उसके पास तेल के ग्राहक नहीं थे। प्रतिबंध हटने से ईरान अन्य देशों को भी तेल बेच पाएगा, जिससे भारत को सस्ते में तेल बेचने की उसकी मजबूरी खत्म हो जाएगी। नतीजा, भारत को तेल अब महंगा मिलेगा।
ऐसा क्यों हुआ
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में बताया कि ईरान ने कच्चे तेल की "फ्री शिपिंग" बंद कर दी है और अब भारतीय तेल शोधक कंपनियों को कच्चे तेल के भाड़े की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। फरवरी, 2013 में ईरान पर प्रतिबंध लगने की वजह से ईरान हमारे देश तक खुद तेल लाकर देता था और सिर्फ आधा किराया मांगा करता था और वो भी रुपये में। लेकिन अब हमारी कंपनियों को पूरा किराया देना होगा, वो भी यूरो में। इसके साथ ही हमें फरवरी, 2013 से जमा हुए बिल भी हमें चुकाने होंगे।
अब क्या होगा?
जाहिर है इसका बोझ सरकार खुद पर नहीं लेना चाहेगी। हालांकि सरकार ने कहा है कि इस घटना के प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में कोई आश्चर्य नहीं कि हमें पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल जाए।