मोदी सरकार का एक साल, भारतीय अर्थव्यवस्था में हुई 'फील गुड फैक्टर' की वापसी

पीएम मोदी की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार मंगलवार को दूसरे साल में प्रवेश करने जा रही है और इस दौरान वैश्विक संस्थानों की समीक्षाओं पर गौर करने और निवेशकों में लौटे विश्वास पर नजर डालने से पिछले एक साल में भारतीय अर्थव्यवस्था की छवि में सुधार के संकेत मिलते हैं।

पिछने साल 16 मई को आम चुनाव के परिणाम आने और मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत होने के बाद से देश के शेयर बाजारों में तेजी चल रही है। यह इस दौरान 17 फीसदी मजबूत हुआ है और इस साल मार्च में इसने ऐतिहासिक उच्च स्तर भी छुआ।

इस दौरान महंगाई ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गई है और डॉलर के मुकाबले रुपये में उतनी गिरावट नहीं आई है, जितनी कई अन्य प्रमुख मुद्राओं में आई है।

विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक और संयुक्त राष्ट्र की कुछ एजेंसियों ने भारत के लिए 7.5-8 फीसदी विकास दर का अनुमान जताया है और चीन को पीछे छोड़ते हुए इसे दुनिया की सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था घोषित किया है।

प्रमुख रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के परिदृश्य को स्थिर से बदलकर सकारात्मक कर दिया है और एक अन्य प्रमुख रेटिंग एजेंसी फिच ने इसके परिदृश्य को स्थिर पर बरकरार रखा है। सरकार के एक साल के प्रदर्शन पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार का यह साल भ्रष्टाचार मुक्त रहा।

एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत ने कहा, 'दुनिया के साथ पूरी तरह से जुड़ी हुई 2,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में सिर्फ सरकार बदलने से उछाल नहीं आ सकता। मोदी सरकार भले ही गंभीर पहल कर रही है, लेकिन नीतियों में बदलाव, विधायी बदलाव और निवेश में तेजी के बाद मांग बढ़ने में करीब दो-ढाई वर्ष लगेंगे। काफी कुछ वैश्विक बाजार पर भी निर्भर करता है, जिसमें सुस्ती चल रही है। कुल मिलाकर मोदी सरकार की शुरुआत बेहतर रही है।'

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के महासचिव ए. दीदार सिंह ने कहा, 'भारत की स्थिति एक साल पहले के मुकाबले बेहतर है। मोदी सरकार द्वारा अपनाई गई नीतियों से कारोबारी माहौल बेहतर हुआ है। सरकार ने अवसंरचना परियोजनाओं पर जोर दिया है और आर्थिक तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं।'

रेटिंग एजेंसी मूडीज की वरिष्ठ उपाध्यक्ष आतसी सेठ ने कहा, 'महंगाई लक्षित करने वाली व्यवस्था स्थापित करना, बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरियां दूर करने की कोशिश, विभिन्न विधेयकों का पारित होना और वास्तविकता पर आधारित बजट, ये सभी साख दर के लिए सकारात्मक हैं, लेकिन आखिरकार अवसंरचना, नियामकीय और प्रशासनिक सुधार लागू किए जाने पर ही यह निर्भर करता है कि सुधार की प्रक्रिया सफल होगी या नहीं।'

इस दौरान पिछली तिथि के प्रभाव से लागू होने वाले कर के मुद्दे ने भारत की छवि को थोड़ा मलिन किया। इस बारे में सेठ ने कहा, 'कराधान संबंधी अनिश्चितता से निवेश पर निश्चित रूप से असर पड़ा है, भले ही बाद में इस पर स्पष्टीकरण दे दिया गया।

इस मुद्दे ने सुधार को पूरी तरह से धूमिल भले ही न किया हो, लेकिन व्यापार की सुविधा बढ़ाने के लिए की जा रही कोशिश से इसने सरकार को भटका दिया।'

आर.पी. संजीव गोयनका समूह के अध्यक्ष संजीव गोयनका ने कहा, 'मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान अच्छी पहल रही है। मेरे विचार से मेक इन इंडिया अभियान का भारत को काफी लाभ मिलेगा।'

उन्होंने कहा, 'आने वाले समय में मुझे अच्छे दिन दिख रहे हैं। स्पेक्ट्रम नीलामी, कोयला नीलामी और आर्थिक स्थिरता लाने में सरकार का प्रदर्शन बेहतर रहा है।'

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उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारत की साख में वृद्धि से माहौल बेहतर हुआ है। बैंकिंग क्षेत्र में भी माहौल बेहतर दिख रहा है। मोदी सरकार की कोशिशों से कारोबारी क्षेत्र में माहौल सकारात्मक बना है।'