खास बातें
- कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोईली ने सोमवार को कहा कि यदि नया कंपनी विधेयक संसद में पारित हो जाता है तो कापरेरेट धोखाधड़ी की जांच करने वाली शाखा एसएफआईओ को आरोपी को हिरासत में लेने का अधिकार होगा।
नई दिल्ली: कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोईली ने सोमवार को कहा कि यदि नया कंपनी विधेयक संसद में पारित हो जाता है तो कापरेरेट धोखाधड़ी की जांच करने वाली शाखा एसएफआईओ को आरोपी को हिरासत में लेने का अधिकार होगा।
मोईली ने ऐसोचैम के एक समारोह में कहा ‘एसएफआईओ को ऐसे मामलों में हिरासत में लेने का अधिकार होगा जिनमें धोखाधड़ी के लिए दंड का प्रावधान है। ऐसे अपराध पर संज्ञान लिया जाएगा और इन आरोपियों को विधेयक के संबंधित प्रावधान से जुड़ी शर्तों के मुताबिक जमानत पर रिहा किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि कंपनी विधेयक 2011,कापरेरेट क्षेत्र का आधुनिकी करेगा और इसमें सुधार करेगा साथ ही इसमें व्याप्त गलत परंपरा को दूर करेगा।
सरकार ने जब गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को करोड़ों रुपए के सत्यम घोटाले की जांच करने के लिए कहा तो यह शाखा मुखर रूप से सामने आई। एसएफआईओ को नए कंपनी विधेयक के प्रावधानों के जरिए कानूनी और सांविधिक शक्ति देने का फैसला इस संगठन को मजबूत करने से जुड़ी वेपा कामेसन समिति की रपट की सिफारिशों पर आधारित है। एसएफआईओ कॉरपोरेट मामले के मंत्रालय के तहत आता है।
आठ सदस्यों वाली समिति ने सुझाव दिया है कि एसएफआईओ को वित्तीय धोखाधड़ी, कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों या चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सचिव जैसे व्यक्तियों की जांच करने और उन पर मुकदमा लगाने का अधिकार होना चाहिए। समिति का मानना है कि एसएफआईओ को आयकर अधिकारियों, सीमाशुल्क विभाग और प्रवर्तन निदेशालय आदि की तरह तलाशी लेने और जब्ती का भी अधिकार होना चाहिए।
इस समिति ने कहा कि यदि धोखाधड़ी हुई है तो एसएफआईओ को स्वत: संज्ञान लेते हुए या सूत्रों पर आधारित सूचनाओं के आधार पर मामले की जांच करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। सिफारिशों में कहा गया कि एसएफआईओं को चार्टर्ड अकाउंटेंट, कानूनी विशेषज्ञ और अधिकारी आदि से सेवाएं लेनी चाहिए। हालांकि मंत्री ने कहा कि आज के दौर में प्रौद्योगिकी दिन प्रतिदिन आधुनिक होती जा रही है और मौजूदा कानून को और कड़ा करना होगा ताकि वित्तीय धोखाधड़ी से मुकाबला किया जा सके।