Mutual funds : म्यूचुअल फंड ने बाजार में बेहतर रिटर्न दिया है
नई दिल्ली: कोरोना की चुनौतियों के बीच निवेशकों ने 2021 में म्यूचुअल फंड (Mutual funds investment ) में अपना भरोसा बढ़ाया है. म्यूचुअल फंड में इस साल करीब 7 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है. भारतीय कंपनियों ने इस साल इक्विटी और ऋण के जरिये 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक धन जुटाया है. हालांकि शेयर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रॉन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 2022 में चुनौतियां बढ़ सकती हैं. ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना के कारण नए साल में मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट पिछली दो लहरों जितना गंभीर नहीं होगा और अर्थव्यवस्था को पहले की तरह झटका नहीं लगेगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया ने काफी हद तक कोविड के साथ रहना सीख लिया है और भारत में तेजी से टीकाकरण होने के साथ ही अर्थव्यवस्था पर ओमिक्रॉन का असर उतना विनाशकारी नहीं होना चाहिए. कम ब्याज दरें, म्यूचुअल फंड के बारे में बढ़ती जागरूकता और अच्छे निवेश के चलते म्यूचुअल फंड में बढ़ोतरी जारी रहेगी.
भारत में म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी के मुताबिक, इस उद्योग का कुल परिसंपत्ति प्रबंधन 2021 नवंबर के अंत तक 24 फीसदी बढ़कर 38.45 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो दिसंबर 2020 में 31 लाख करोड़ रुपये था.
दिसंबर के अंत में म्यूचुअल फंड का कुल आंकड़ा थोड़ा कम या इतना ही रह सकता है, क्योंकि इस समय बाजार में सुधार का दौर चल रहा है.दिसंबर में अग्रिम कर भुगतान के ऋण फंड्स से कुछ निकासी हो सकती है. एम्फी के अध्यक्ष ए बालासुब्रमण्यम ने कहा कि ब्याज दरें कम होने से निवेशक पारंपरिक तरीकों के अलावा दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. म्यूचुअल फंड के बारे में जागरूकता बढ़ने से लोगों की भागीदारी बढ़ी है.
दूसरी ओर भारतीय कंपनियों ने वर्ष 2021 में इक्विटी और कर्ज के जरिये 9 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. अगर ओमिक्रॉन के चलते हालात खराब नहीं हुए तो इसमें 2022 के दौरान और अधिक मजबूती आने की उम्मीद है. ऐसा लग रहा है कि बाजार में धन की कोई कमी नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक काफी समय से अच्छी पूंजी लिक्विडिटी का लाभ उठा रहे हैं और बेहतर कर्जदारों के लिए अवसर काफी अच्छे हैं.
वर्ष 2021 में ऋण बाजारों के जरिये पूंजी जुटाने में तेजी से गिरावट आई है, जबकि इक्विटी फंड जुटाने में मजबूती आई है. इस साल दिसंबर के मध्य तक कुल 9.01 लाख करोड़ रुपये में से 5.53 लाख करोड़ रुपये ऋण बाजार से जुटाया गया, जबकि 2.1 लाख करोड़ रुपये इक्विटी मार्केट से मिला.