सरसों की MSP से अधिक रेट पर खरीद, फिर भी किसानों और तेल मिल मालिकों को मुनाफा कम

फसल तैयार होते ही किसानों को थोड़े ज्यादा पैसे देकर बड़े पैमाने पर सरसों को स्टोर करने वालों ने कमाया मुनाफा, सरसों के तेल के दाम आसमान पर

सरसों की MSP से अधिक रेट पर खरीद, फिर भी किसानों और तेल मिल मालिकों को मुनाफा कम

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

पेट्रोल और डीजल ही नहीं सरसों (Mustard) के तेल के दाम भी आसमान छू रहे हैं. मार्च से लेकर अब तक इसके दाम में 50 रुपए लीटर का इजाफा हुआ है. वहीं किसानों को भी पहली बार सरसों की फसल के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य 4650 रुपए से ज्यादा मिले हैं. इसी के चलते अनाज मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद बहुत कम हुई है. लेकिन क्या किसान और तेल मिल मालिक इससे खुश हैं? 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा था कि एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस लगाने से आम लोगों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. वित्त मंत्री के भाषण के वक्त सरसों का तेल 120 रुपए लीटर था जो अब बढ़कर 180 रुपए लीटर हो गया है. हालांकि इस बीच पहली बार सरसों की फसल के दाम MSP से कहीं ज्यादा यानी 7000 रुपए के आसपास आ गए हैं. लेकिन क्या इससे किसान और मिल मालिक खुश हैं? 

हरियाण के तावडूं अनाज मंडी में यहां 13 एकड़ के सरसों किसान शरीफ हमें मिले. सरसों का दाम अब भले 6800 रुपए पर हो लेकिन दो महीना पहले 5100 में ये अपनी सरसों बेच चुके हैं. शरीफ ने कहा कि ''हमने 5100 में बेच दी. हमको ये पता होता कि सात हजार दाम जााएंगे तो हम रोक लेते. लेकिन हमें लगा कि 5100 रुपए ही अच्छा दाम है, इसलिए बेच दिया.''

तावडूं अनाज मंडी में करीब 80 हजार क्विंटल सरसों बिकी है लेकिन सरकारी खरीद जीरो है. पिछले साल जहां सरसों MSP से कम 3300 में बिकी थी, इस बार आढ़तियों ने MSP से ज्यादा 5000 रुपए पर खरीदी. यही वजह है कि शाहिद जैसे आढ़ती के पास सरसों का स्टाक भरा है. शाहिद ने कहा कि ''इस बार सरकारी रेट 4650 था लेकिन 15 मार्च से अब तक कभी सरकारी रेट पर सरसों बिकी ही नहीं, ऊंची बिकी. इसलिए सरकारी खरीद हुई नहीं. हम लोगों ने लिया और मिल मालिकों ने लिया है.''

सरसों की फसल ही नहीं तेल के दाम भी आसमान छू रहे हैं. खुद उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक पिछले साल 15 मई को 132 रुपए लीटर के मुकाबले इस बार सरसों का तेल 179 रुपए लीटर है. सरसों का तेल मिल चलाने वाले संजय गुप्ता कहते हैं कि सरसों के दाम बढ़ने से उनको कोई फायदा नहीं है. संजय गुप्ता ने कहा कि ''हमें क्या फायदा है पहले हम चार हजार रुपए क्विंटल खरीदकर तेल बेचते थे अब हमें सात हजार रुपए क्विंटल खरीदना पड़ रहा है. हमारी तो लागत और बढ़ गई.''


जानकार मानते हैं कि तेल के दाम हाल फिलहाल में कम नहीं होने वाले हैं. अंतराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते पॉम आयल के दाम और भारत सरकार के एग्रीकल्चर इन्फ्रा और डेवलपमेंट सेस के चलते सरसों तेल के साथ वनस्पति तेल के दाम भी बढ़े हैं. कृषि मामलों के विशेषज्ञ हरवीर सिंह ने कहा कि ''फिलहाल दाम नहीं घटने वाले हैं क्योंकि आयात पर सरकार का सेस और अब सरसों के तेल में कोई दूसरा तेल मिलाकर आप सरसों के तेल के नाम से नहीं बेच सकते हैं, इसलिए दाम फिलहाल घटने वाले नहीं है.''

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तेल की बढ़ती कीमत के मद्देनजर अब सरकार ने बड़ी तेल कंपनियों से सरसों के स्टाक की जानकारी भी मांगी है. सरसों के तेल की बढ़ती कीमतों से मुनाफा वही लोग ज्यादा ले रहे हैं जिन्होंने फसल तैयार होते ही किसानों को थोड़े ज्यादा पैसे देकर बड़े पैमाने पर सरसों को स्टोर कर लिया है. यही वजह है कि सरसों के तेल के खेल में किसानों को मुनाफा उस तरह नहीं हुआ है जैसा बताया जा रहा है.