यह ख़बर 24 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

फोन हैकिंग घोटाले में और ब्रिटिश अखबार फंसे

खास बातें

  • ब्रिटेन के फोन हैकिंग घोटाले में रूपर्ट मर्डोक की मीडिया कंपनी के अलावा दूसरे समूह के अखबार भी फंसते नजर आ रहे हैं।
लंदन:

ब्रिटेन के फोन हैकिंग घोटाले में रूपर्ट मडरेक की मीडिया कंपनी के अलावा दूसरे समूह के अखबार भी फंसते नजर आ रहे हैं और मिरर ग्रुप पर भी ऐसे ही आरोप लगे हैं। अबतक न्यूज इंटरनेशनल ग्रुप पर ही फोन हैंकिग घोटाले के बादल मंडरा रहे थे जिसके चलते न्यूज ऑफ द वर्ल्ड को बंद करना पड़ा। लेकिन अब एक नाटकीय घटनाक्रम में मिरर ग्रुप के पूर्व पत्रकारों ने कहा है कि उन्होंने अपने अखबारों में धड़ल्ले से फोन हैकिंग होते हुए देखा। डेली मिरर के पूर्व पत्रकार जेम्स हिपवेल ने द इंडिपेनडेंट से कहा कि वह न्यायमूर्ति ब्रियान लेवेसन की अध्यक्षता वाली जांच समिति के समक्ष गवाही देने को इच्छुक है। बीबीसी के मुताबिक भी संडे मिरर के एक पूर्व कर्मचारी ने दावा किया कि उन्होंने अपने समाचार कक्ष नियमित फोन हैकिंग होते हुए देखा और अभिनेता लिज हर्ले एवं फुटबॉल खिलाड़ी रियो फर्डिनेंड को निशाना बनाया गया। ये दोनों ही अखबार न्यूज इंटरनेशनल के टेब्लायड के प्रतिद्वंदियों में शामिल रहे है। हालांकि ट्रिनिटी मिरर ने यह कहते हुए इन आरोपों में अपना बचाव किया है कि उसके पत्रकार कानून के अंदर ही काम करते हैं।


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