खास बातें
- 2जी घोटाले में सिनेयुग फिल्म्स के निदेशक करीम मोरानी की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सिनेयुग फिल्म्स के निदेशक करीम मोरानी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मोरानी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मोरानी पर आरोप है कि उन्होंने शाहिद बलवा की कंपनी डीबी रियलिटी से मिली रिश्वत सिनेयुग के माध्यम से कलईनार टीवी तक पहुंचाई। विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी ने मोरानी को जमानत देने से इनकार कर दिया। मोरानी पर डीबी रीयल्टी से कलईनगर टीवी को 200 करोड़ रुपये के हस्तांतरण में सहयोग का आरोप है। कलईनगर टीवी में डीएमके की सांसद कनिमोई की 20 प्रतिशत और उनकी मां की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सीबीआई का आरोप है कि मोरानी ने 200 करोड़ रुपये के लेनदेन को पूरा कराने के लिए 200 करोड़ रुपये लिए। अदालत ने अभियुक्त की इस दलील को नहीं माना कि जांच के दौरान उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था, इसलिए उसे जमानत मिलनी चाहिए। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका को ठुकराए जाने के बाद मोरानी ने नियमित जमानत याचिका दायर की थी। सीबीआई ने 2जी मामले में अपने दूसरे आरोप पत्र में कहा था कि स्वान टेलीकॉम और डायनामिक्स रीयल्टी के प्रवर्तकों शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका ने कलईनगर टीवी को कुसेगांव फूट्र्स एंड वेजिटेबल्स तथा मोरानी की सिनेयुग फिल्म्स के जरिये 200 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए। इससे पहले अदालत ने मोरानी की चिकित्सा आधार पर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। जज ने जमानत याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा है कि करीम मोरानी ने एक महीने में सात बार जमानत याचिका दायर की। उन्होंने यह भी कहा कि करीम मोरानी की तबियत ठीक है, उन्हें कोई बुखार नहीं है और उनका ब्लड प्रेशर भी नॉमर्ल है।(इनपुट भाषा से भी)