खास बातें
- स्पेक्ट्रम आवंटन नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने घोषणा की कि अब दूरसंचार सेवा लाइसेंस के साथ रेडियो स्पेक्ट्रम नहीं दिया जाएगा।
New Delhi: स्पेक्ट्रम आवंटन नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि अब दूरसंचार सेवा लाइसेंस के साथ रेडियो स्पेक्ट्रम नहीं दिया जाएगा। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि अब सभी ऑपरेटरों को शुरुआती के साथ अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए बाजार कीमत चुकानी होगी। नीति में इस बदलाव से मोबाइल सेवाएं महंगी हो सकती हैं। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित घोटाले के मद्देनजर सरकार ने स्पेक्ट्रम और लाइसेंस को अलग-अलग करने की यह घोषणा की है। सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, भविष्य में लाइसेंस के साथ स्पेक्ट्रम नहीं दिया जाएगा। दूरसंचार ऑपरेटरों जारी किया जाने वाला लाइसेंस, एकीकृत सेवा लाइसेंस होगा। लाइसेंसधारक को इसके जरिये चाहे जिस प्रकार भी दूरसंचार सेवा देने की अनुमति होगी। मंत्री ने कहा कि यदि लाइसेंस धारक वायरलेस सेवाएं देना चाहेगा, तो उसे बाजार आधारित प्रक्रिया के जरिये स्पेक्ट्रम हासिल करना होगा। अभी तक ऑपरेटरों को दूरसंचार लाइसेंसों के साथ ही स्पेक्ट्रम भी दिया जा रहा था, जिससे कॉल दरें काफी निचले स्तर पर आ गई हैं और सेवाप्रदाताओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा छिड़ी हुई है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि नए ऑपरेटरों का लाइसेंस वैध रहता है, तो उन्हें 1.8 मेगाहर्ट्ज के अतिरिक्त 2जी स्पेक्ट्रम के लिए बाजार मूल्य चुकाना होगा। इससे उनके लिए परिचालन वित्तीय दृष्टि से व्यावहारिक नहीं रह जाएगा। वहीं पुराने ऑपरेटरों, जिनके पास 6.2 मेगाहर्ट्ज से अतिरिक्त स्पेक्ट्रम है, उन्हें इसके लिए बाजार मूल्य के आधार पर कीमत चुकानी होगी। सिब्बल ने कहा कि ये बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएंगे। संपर्क किए जाने पर एक नए ऑपरेटर ने कहा कि नई व्यवस्था पुराने ऑपरेटरों के लिए फायदे की स्थिति है। पुराने ऑपरेटरों को 6.2 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम रखने की अनुमति दी गई है, जबकि नए ऑपरेटरों को 1.8 मेगाहर्ट्ज के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए बाजार कीमत चुकानी होगी। ट्राई ने पिछले साल 2जी स्पेक्ट्रम की कीमतों को 3जी स्पेक्ट्रम के मूल्य से जोड़ने का सुझाव दिया था। दूरसंचार नियामक का यह प्रस्ताव उस समय आया था, जब सरकार ने 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से 67,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई थी। हालांकि जीएसएम ऑपरेटरों के विरोध के मद्देनजर ट्राई ने कहा था कि वह इस मसले पर नए सिरे से विचार करेगा और उसके बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप देगा। ट्राई की पूर्व की सिफारिशों में ऑपरेटरों पर 6.2 मेगाहर्ट्ज से अतिरिक्त 2जी स्पेक्ट्रम पर एकमुश्त शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया था।