यह ख़बर 03 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार में तेजी बने रहने की संभावना

खास बातें

  • विदेशी निवेशकों का विश्वास फिर से जगने, तेल की कीमतों में कमी तथा खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी से बाजार में तेजी का दौर कायम रहने की संभावना है।
New Delhi:

भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेशकों का विश्वास फिर से जगने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट तथा खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी के संकेत से अगले सप्ताह भी शेयर बाजार में तेजी का दौर कायम रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और खाद्य मुद्रास्फीति नरम पड़ने के साथ साथ त्योहारी मौसम के लिए मांग का सत्र भी जल्द ही शुरू होने वाला है। इससे कंपनियों में कारोबारी गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। ऐसी सकारात्मक खबरों से बाजार में तेजी का दौर कायम रहेगा। सीएनआई रिसर्च के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक किशोर पी ओस्टवल के अनुसार आखिर सरकार ने ईंधन कीमतों में वृद्धि की घोषणा कर सबिसडी के मोर्चे पर सक्रियता दिखाई है और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने केयर्न एनर्जी को अपनी भारतीय इकाई वेदांता रिसोर्सेज को बेचने के सौदे को मंजूरी दे दी है। बाजार के लिहाज से ये फैसले अनुकूल हैं। बहरहाल, बीते सप्ताह यूनान ऋण संकट की चिंता कुछ कम होने और विदेशी संस्थागत निवेशकों की जोरदार लिवाली से बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक सप्ताहांत में 522.12 अंक अथवा 2.86 प्रतिशत की तेजी के साथ 18,762.80 अंक पर बंद हुआ। आईआईएफएल इंडिया प्रा. क्लाइंट के शोध प्रमुख अमर अंबानी ने कहा कि वित्तवर्ष 2012 की पहली तिमाही के कार्यपरिणाम से आगामी सप्ताह में बाजार की धारणा तय होने की संभावना है। विदेशी संस्थागत निवेशकों का धन प्रवाह भी काफी अहम होगा, क्योंकि मौजूदा तेजी में विदेशी निवेशकों की अहम भूमिका रही है। जुलाई में विशेषकर हाल के ईंधन कीमतों में वृद्धि के बाद मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति काफी अहम पहलू रहेगा, जिस पर बाजार की निगाह केंद्रित होगी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि जुलाई में बाजार का रुख मानसून की बरसात की प्रगति के साथ-साथ निगमित कंपनियों के वित्तवर्ष 2012 की पहली तिमाही के कार्य परिणाम से भी निर्धारित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार के डीजल, किरोसिन और रसोई गैस की कीमत बढ़ाने के फैसले ने भारतीय शेयर बाजार में उम्मीद की किरण फैला दी है। बाजार सूत्रों ने कहा कि मुद्रास्फीति के नरम पड़ने और सरकार के इस दावे के कारण कि वह चालू वित्तवर्ष में 8.75 प्रतिशत की विकास दर को हासिल कर लेगी, बाजार धारणा में और सुधार होगा। पिछले सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 5,770 करोड़ रुपये के शेयरों की लिवाली की। सप्ताह के दौरान रीयल्टी, धातु, पूंजीगत माल और बैंकिंग खंड के शेयर प्रमुखता के साथ लाभ में रहे। वित्तीय कार्यपरिणामों की शुरुआत 8 जुलाई को एचडीएफसी के कार्य परिणाम से होगी, जिसके बाद 12 जुलाई को इंफोसिस का कार्यपरिणाम आएगा।


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