यह ख़बर 15 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

महंगाई ने सरकारी अनुमानों को दिखाया ठेंगा

खास बातें

  • सकल थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च में चढ़कर 8.98% हो गई, जबकि रिजर्व बैंक ने इसके 8% तक रहने का अनुमान लगाया था।
New Delhi:

महंगाई दर में मार्च, 2011 तक कमी की भविष्यवाणी कर रहे आर्थिक पंडितों के सारे अनुमान धरे रह गए। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार सकल थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च, 2011 में चढ़कर 8.98 प्रतिशत हो गई, जबकि रिजर्व बैंक ने इसके 8 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया था। विनिर्मित वस्तुओं और साग-सब्जियों की महंगाई से मुद्रास्फीति को बल मिला है, जबकि रिजर्व बैंक बाजार में सकल मांग पर अंकुश लगाने के लिए पिछले मार्च से लगातार कर्ज महंगा करने के नीतिगत कदम उठाता रहा है। फरवरी, 11 में मुद्रस्फीति 8.31 प्रतिशत थी। यह लगातार दूसरा महीना है, जब सकल मुद्रास्फीति में वृद्धि दर्ज की गई है। महंगाई दर बढ़ने से 3 मई को पेश की जाने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि किए जाने की संभावना बढ़ गई है पर इसका असर आर्थिक वृद्धि और रोजगार की संभावनाओं पर पड़ सकता है। फरवरी में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर मात्र 3.6 प्रतिशत रह गई, जबकि इससे एक माह पूर्व यह 3.7 प्रतिशत थी। औद्योगिक वृद्धि में गिरावट को ब्याज दरों में वृद्धि के साथ साथ तुलनात्मक आधार का प्रभाव भी बताया, क्योंकि पछले वर्ष इसी दौर में औद्योगिक वृद्धि काफी ऊंची थी।


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