यह ख़बर 08 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

मारन को 2जी घोटाले में क्लीन चिट नहीं दी: CBI

खास बातें

  • सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि द्रमुक के सांसद दयानिधि मारन को 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में क्लीन चिट नहीं दी गई है।
नई दिल्ली:

सीबीआई ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि द्रमुक के सांसद दयानिधि मारन को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में क्लीन चिट नहीं दी गई है। साथ ही जांच एजेंसी ने इन आरोपों पर भी आपत्ति जताई कि इस मामले में उसकी जांच में ईमानदारी की कमी है। सीबीआई की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और ए के गांगुली की पीठ को बताया, अभी तक की जांच में एयरसेल की बिक्री मलेशिया के मैक्सिस समूह को करने के मामले में मारन द्वारा जबरन दबाव डालने के बारे में कोई प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने कहा, शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि मलेशिया की कंपनी सी शिवशंकरन की कंपनी का अधिग्रहण करने से पहले मंत्री और उनके भाई के संपर्क में थी। सीबीआई ने कहा कि मीडिया द्वारा पिछली सुनवाई के आधार पर की गई गलत रिपोर्टिंग की वजह से ऐसा लगने लगा है कि मारन को इस मामले में क्लीन चिट दी गई है। वेणुगोपाल ने कहा, दो सितंबर को पेश स्थिति रपट को लेकर गलत रिपोर्टिंग और गलत व्याख्या की गई। जांच एजेंसी ने एनजीओ सेंटर फार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन के इस आरोप पर भी नाराजगी जताई कि इस मामले में जांच में ईमानदारी कम है। वेणुगोपाल एनजीओ के वकील प्रशांत भूषण द्वारा दायर उस अर्जी का उल्लेख कर रहे थे कि अभी तक जांच एजेंसी ने जो भी जांच की है वह निचली अदालत में टिक नहीं पाएगी। उन्होंने कहा, प्रशांत भूषण ने अर्जी में सीबीआई के खिलाफ बयान दर्ज किया है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें इस बयान पर आपत्ति है, क्योंकि हम इस न्यायालय के आदेश पर काम कर रहे हैं। मारन मई, 2004 से मई, 2007 तक दूरसंचार मंत्री थे। उन्हें जुलाई में कपड़ा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। सीबीआई ने कहा था कि वह शिवशंकरन द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट की जांच कर रही है। शिवशंकरन के पास 2006 में एयरसेल का स्वामित्व था। सीबीआई ने कहा कि मारन के कार्यकाल के दौरान एयरसेल के प्रवर्तक को आशय पत्र (एलओआई) देने में जानबूझकर देरी की गई। एजेंसी ने कहा है कि एयरसेल को मैक्सिस समूह को बेचे जाने के बाद मलेशियाई कंपनी ने मारन परिवार के कारोबार में निवेश किया था। सीबीआई ने छह जुलाई को उच्चतम न्यायालय में मारन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने 2006 में चेन्नई के दूरसंचार ऑपरेटर पर अपनी हिस्सेदारी मैक्सिस को बेचने के लिए दबाव डाला था। एजेंसी ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा कि मारन ने शिवशंकरन को एयरसेल में अपनी हिस्सेदारी मैक्सिस समूह को बेचने के लिए दबाव डाला था। मारन ने इन आरोपों का खंडन किया था।


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