पेरिस: भारत के नामी उद्योगपति आनन्द महिन्द्रा ने महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए अपने दृष्टिकोण को देश के आईटी एवं विनिर्माण ताकतों के बीच एक ‘जुगलबंदी’ के तौर पर परिभाषित किया है।
16.9 अरब डॉलर के महिन्द्रा समूह के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक आनन्द महिन्द्रा का मानना है कि उनके समूह की तरह विविध कारोबारी क्षेत्रों में काम करने वाले उद्योग घरानों को अगुवाई करने और इस तरह के अलग-अलग क्षेत्र के गठबंधन के लिए सही तरह की नीतिगत रूपरेखा तैयार करने के वास्ते नरेंद्र मोदी नीति सरकार के साथ काम करने की जरूरत है।
साठ वर्षीय महिन्द्रा ने रविवार को संपन्न हुए पेरिस एयर शो के दौरान एक खास बातचीत में कहा, ‘यदि हम लीक से हटकर नजरिया नहीं अपनाते हैं तो 'मेक इन इंडिया' काम नहीं करेगा। हमें भविष्य में एक ऊंची छलांग लगानी होगी।’
उन्होंने कहा, ‘इसके लिए एक अलग समग्र नजरिया अपनाने और इस बात की पहचान करने की जरूरत है कि यह सवाल महज चीन के रास्ते चलने का नहीं है। हमारा ‘मेक इन इंडिया’ चीन से इस मायने में भिन्न होना चाहिए कि हमें अपने आईटी कौशल एवं विनिर्माण कौशल के बीच तालमेल या जुगलबंदी करते हुए तेज विनिर्माता बनना होगा।’
मोदी सरकार के संदर्भ में महिन्द्रा ने कहा, ‘इसके लिए भारी समर्थन है और यह सीधे प्रधानमंत्री की ओर से है। अर्थशास्त्री की पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद वह इस तरह के तर्कों’ के प्रति संवेदनशील हैं।’ नीतिगत रूपरेखा के बारे में उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि नीतिगत मोर्चे पर हमें उनके साथ मिलकर काम करना है। यह पूरी तरह से एक नया क्षेत्र है और हमें विचार पेश करने होंगे कि इस तरह की जुगलबंदी के लिए नियमन व प्रोत्साहन कैसे बदल सकते हैं।’