खास बातें
- इस सम्मेलन में कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी प्रति महीने दस हजार रुपये नियत करने की मांग की जाएगी।
नई दिल्ली: देशभर के श्रमिक संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं का दिल्ली में आज सम्मेलन होने जा रहा है। इसका आयोजन विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ किया गया है। सम्मेलन में कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी प्रति महीने दस हजार रुपये नियत करने की मांग की जाएगी।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ‘महापड़ाव’ सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय श्रम संगठनों, औद्योगिक संघ के नेताओं और सांसदों के सहयोग से कर रहा है।
सीटू के अध्यक्ष एके पद्मनाभम ने कहा कि मांगों की फेहरिस्त वाला एक ‘साझा ज्ञापन’ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपा जाएगा। मांगों में देश के कामगारों को नियमित करने और उन्हें पेंशन, ग्रैच्युटी और प्रोविडेंट फंड जैसी सुविधाएं देना शामिल हैं।
पद्मनाभम ने कहा, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों में शामिल लाखों श्रमिकों का सरकार शोषण कर रही है। उन्हें श्रमिक के रूप में मान्यता नहीं दी जाती और उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता, कार्यकर्ता और मित्र, अतिथि, यशोदा और ममता जैसे लुभावने नाम दिए जाते हैं ताकि उनके साथ हो रहे शोषण को छिपाया जा सके।उन्होंने कहा कि उन्हें न्यूनतम पारिश्रमिक नहीं दिया जाता और उनकी न तो नौकरी सुरक्षित होती है और न ही उनको सामाजिक सुरक्षा मिलती है। इनमें से अधिकतर महिलाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों में ऐसे करीब एक करोड़ श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है ।
इनमें 27 लाख से ज्यादा आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायक हैं, जो आईसीडीएस कार्यक्रम में शामिल हैं और करीब साढ़े आठ लाख महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा के रूप में तैनात हैं।