यह ख़बर 06 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विकसित देशों के जोखिम से खुद बचे एशिया : कुरोदा

खास बातें

  • उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को खुद को विकसित दुनिया से आ रही समस्याओं से बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए। एडीबी के अध्यक्ष हारुहिको कुरोदा ने यह बात कही।
मनीला:

उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को खुद को विकसित दुनिया से आ रही समस्याओं से बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष हारुहिको कुरोदा ने शनिवार को यह बात कही।

एडीबी की 45वीं सालाना बैठक के समापन के बाद संवाददाता सम्मेलन में कुरोदा ने कहा, ‘‘एशियाई क्षेत्र में वृद्धि मजबूत है। निकट भविष्य के जोखिम हैं जिनसे बचाव किया जाना चाहिए। इनमें से कुछ समस्याएं विकसित दुनिया से आ रही हैं।’’ उन्होंने कहा कि कई चुनौतियों के बावजूद क्षेत्र का आधार मजबूत है। वैश्विक संकट के दौर में भी इस क्षेत्र ने मजबूत वृद्धि दर्ज की। कुरोदा ने कहा, ‘‘लगातार अंतरराष्ट्रीय समर्थन से एशिया अपनी आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियों को आगे बढ़ाएगा। इससे कुल मिलाकर पूरे विश्व को फायदा होगा।’’ एडीबी के प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरो क्षेत्र के देश सॉवरेन ऋण संकट से जूझ रहे हैं और दुनिया कच्चे तेल सहित जिंसों की ऊंची कीमतों की समस्या का सामना कर रही है।

कुरोदा ने कहा कि एशिया के पास इस समय एक बेहतरीन मौका है जब वह नया रास्ता चुनकर अपने लोगों को बेहतर जीवन उपलब्ध करा सकता है। और साथ ही वैश्विक वृद्धि और बेहतरी में योगदान कर सकता है।

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उन्होंने कहा कि एशियाई विकास कोष में अगले चार साल में 12.4 अरब डॉलर डालने से एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों में गरीबी से लड़ने में मदद मिलेगी। कुरोदा ने कहा कि सदस्य देशों को अधिक समावेशी हरित और ज्ञान आधारित वृद्धि के लिए आपसी सहयोग और एकीकरण के जरिये काम करना चाहिए। एडीबी के चार साल के सालाना सम्मेलन में करीब 5,000 लोगों ने भाग लिया। एडीबी की अगली सालाना बैठक भारत में ग्रेटर नोएडा में होगी।