खास बातें
- दिल्ली हाईकोर्ट ने 2जी मामले में डीएमके सांसद कनिमोई और कलईनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार की जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया है।
New Delhi: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में आरोपी डीएमके सांसद कनिमोई और कलईनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार की जमानत याचिकाएं यह कहकर खारिज कर दीं कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत हैं। न्यायमूर्ति अजित भरिहोक ने कहा, आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कुछ सबूत हैं। अपराध में आरोपियों की सह-अपराधिता पर विचार करते हुए जमानत याचिकाएं खारिज की जाती हैं। कनिमोई की मां रजति अम्मल और डीएमके संसदीय दल के नेता टीआर बालू आदेश सुनाए जाने के वक्त अदालत कक्ष में मौजूद थे। सीबीआई ने कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि की 43 वर्षीय बेटी कनिमोई और कुमार का नाम लिया था। कनिमोई और कुमार दोनों की कलईनार टीवी प्राइवेट लिमिटेड में 20-20 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे शाहिद बलवा की कंपनी डीबी रीयल्टी के माध्यम से कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। डीएमके प्रमुख की पत्नी दयालु अम्मल के पास चैनल में बाकी की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उनका नाम आरोपियों की सूची से बाहर किया जा चुका है। कनिमोई और कुमार ने 23 मई को निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसने पूर्व में जमानत आग्रह को यह कहकर खारिज कर दिया था कि उनसे संबंधित अपराध गंभीर हैं और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने 20 मई को दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया था। वे इस समय तिहाड़ जेल में बंद हैं। कनिमोई ने विशेष अदालत से इस आधार पर जमानत मांगी थी कि वह एक महिला हैं। उन्होंने उच्च न्यायालय से यह कहकर राहत मांगी थी कि उनके स्कूल जाने वाले बच्चे को उनकी देखरेख की आवश्यकता है, क्योंकि उसके पिता विदेश में काम करते हैं। न्यायमूर्ति भरिहोक ने यूनिटेक समूह के प्रबंध निदेशक संजय चंद्र और रिलायंस एडीएजी के प्रबंध निदेशक गौतम दोषी सहित 23 मई को पांच कारपोरेट हस्तियों की जमानत याचिकाएं यह कहकर खारिज कर दी थीं कि गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना है।