खास बातें
- वेतन और ब्याज से पांच लाख रुपये तक की सालाना आय पर अब रिटर्न दाखिल नहीं करनी होगी। 85 लाख आयकरदाताओं को राहत मिलेगी।
नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वेतन और ब्याज से पांच लाख रुपये तक की सालाना आय पर अब रिटर्न दाखिल नहीं करनी होगी। सरकार के इस कदम से करीब 85 लाख आयकरदाताओं को राहत मिलेगी। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अनुसार 10 हजार रुपये सालाना ब्याज आय वाले वेतन भोगी व्यक्तियों को भी इसका लाभ मिलेगा। सीबीडीटी के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र ने बताया सीबीडीटी ने योजना को अधिसूचित कर दिया है। इसमें पांच लाख रुपये तक की सालाना आय वाले वेतनभोगियों को आयकर रिटर्न भरने से छूट दी गई है। ऐसे वेतनभोगियों को निर्धारण वर्ष 2011.12 के लिये अब रिटर्न भरने की जरुरत नहीं होगी। चंद्र ने स्पष्ट किया वर्ष 2010.11 में कुल मिलाकर पांच लाख रुपये तक की आय पर जरुरी कटौती आदि, एक नियोक्ता से प्राप्त वेतन और बचत बैंक खाते से 10,000 रुपये तक की ब्याज आय वाले व्यक्तियों को आयकर रिटर्न नहीं भरनी होगी। उन्होंने कहा कि यह योजना उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी जिन्होंने किसी एक वित्तीय वर्ष में दो अथवा दो से अधिक नियोक्ताओं से वेतन लिया है। नौकरी बदलने की स्थिति में यह होता है। सीबीडीटी अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे लोग भी इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे जिनकी वेतन और ब्याज को छोड़कर अन्य स्रोतों से कोई आय है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें आयकर अधिनियम 1961 की धारा 142.1 अथवा 148 और 153ए अथवा 153सी के तहत आयकर रिटर्न भरने का नोटिस जारी किया गया है। पेंशनरों के मामले में प्रकाश चंद्र ने कहा पेंशनरों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा बशर्ते कि उनकी ब्याज आय, करयोग्य पेंशन और वेतन आदि मिलाकर सालाना आय पांच लाख रुपये तक हो। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे वेतनभोगी व्यक्ति जिन्हें आयकर का रिफंड लेना है उन्हें भी रिटर्न भरना होगा। उन्होंने कहा कि योजना के तहत नियोक्ता की तरफ से दिया जाने वाला फार्म 16 ही आयकर रिटर्न के तौर पर माना जायेगा। इससे पहले सभी वेतनभोगी व्यक्तियों को आयकर अधिनियम 1961 के तहत हर साल कर रिटर्न भरनी जरुरी थी।