नई दिल्ली:
सेबी ने निवेशकों के पैसे लौटाने के मामले में सहारा के दावों पर सवाल उठाए हैं। सेबी ने इससे जुड़े कुछ दस्तावेज़ एनडीटीवी को मुहैया कराए हैं, जिनमें सेबी ने सहारा की उन ज़मीनों को लेकर सवाल उठाए हैं जिनके दस्तावेज़ सहारा ने सेबी को सौंपे हैं।
कोर्ट का कहना है कि सेबी इन ज़मीनों को बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाए, लेकिन सेबी का कहना है कि इन ज़मीनों की क़ीमत बढ़ा−चढ़ाकर बताई गई है।
पैसे लौटाने के सहारा के दावे में कई खामियां सेबी
सहारा की ज़मीनों का सच सेबी ने सामने रखा
सहारा ने सेबी को 40,000 करोड़ की ज़मीन के मालिकाना हक़ के दस्तावेज़ दिए। लेकिन सहारा ने पुराने मालिकाना हक़ से जुड़े तमाम दस्तावेज़ नहीं मुहैया कराए। सेबी का कहना है कि पुराने दस्तावेज़ नहीं होने से सहारा के दिए दस्तावेज़ों की जांच नहीं हो सकी।
सेबी ने एम्बी वैली की क़ीमत 10,000 करोड़ होने पर सवाल उठाए हैं। एम्बी वैली को लेकर कई मुक़दमें चल रहे हैं। एम्बी वैली को पर्यावरण विभाग की मंज़ूरी भी नहीं है।
सेबी ने वर्सोवा की ज़मीन की क़ीमत 20000 करोड़ होने पर भी सवाल उठाए हैं। वर्सोवा की ज़मीन का बाज़ार भाव सिर्फ़ 118 करोड़ है। सेबी का दावा है कि सहारा ने सिर्फ़ एक करोड़ रुपये लौटाए हैं। वहीं, सहारा ने 19000 करोड़ रुपये लौटाने का दावा किया है। सेबी कह रही है कि 19000 करोड़ लौटाने के सबूत नहीं हैं।
सेबी ने सहारा के लाखों निवेशक होने के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। सेबी का कहना है कि रिफंड के लिए सिर्फ़ 3500 आवेदन मिले। 3500 में से सिर्फ़ 560 लोग ही रिफंड पाने के योग्य पाए गए।