खास बातें
- आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम की अगुवाई वाले विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड ने पिछले महीने जेट के विदेशी भागीदार के रूप में एतिहाद को शामिल करने के प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया था। इस सौदे में 2,058 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्रस्तावित है।
नई दिल्ली: विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) 29 जुलाई को जेट एतिहाद सौदे पर विचार करेगा। लंबे समय से लंबित इस सौदे में 2,058 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्रस्तावित है।
आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम की अगुवाई वाले विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड ने पिछले महीने जेट के विदेशी भागीदार के रूप में एतिहाद को शामिल करने के प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया था। मुख्य रूप से स्वामित्व तथा प्रभावी नियंत्रण के मुद्दे को लेकर फैसला टाला गया था।
विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की 29 जुलाई की बैठक के एजेंडा में जेट-एतिहाद का प्रस्ताव शामिल है। एफआईपीबी की 14 जून को हुई बैठक के बाद वित्त मंत्रालय ने जेट एयरवेज को पत्र लिखकर स्वामित्व के ढांचे पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। उसने बाजार नियामक सेबी को पत्र लिखकर पूछा था कि 'वास्तविक स्वामित्व' तथा 'प्रभावी नियंत्रण' को इस सौदे में कैसे परिभाषित किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि जेट द्वारा एफआईपीबी की पिछले महीने हुई बैठक में दिए गए शेयरधारक तथा संचालन करार के अनुसार कंपनी का आखिरी स्वामित्व विदेशी हाथों में होगा। प्रस्तावित जेट-एतिहाद सौदे के अनुसार अबू धाबी की कंपनी भारतीय एयरलाइंस में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर रही है।
हालांकि, इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि एतिहाद को वोटिंग अधिकार और अन्य अधिकार उसकी प्रस्तावित 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी से ज्यादा मिलेंगे। सेबी अधिग्रहण नियमों के अनुसार किसी सूचीबद्ध भारतीय कंपनी में 25 फीसदी या अधिक की हिस्सेदारी लेने की स्थिति में आम शेयरधारकों से 26 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने के लिए खुली पेशकश लाना अनिवार्य है।
बाजार नियामक सेबी चेयरमैन यूके सिन्हा ने इसी सप्ताह यह भी कहा कि किसी भी कंपनी द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की स्थिति में उसे भी आम शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लानी होगी। फिर चाहे ऐसी स्थिति में अधिग्रहण 25 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी का क्यों न हुआ हो।