खास बातें
- उत्तर प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन और ज्वेल्स एंड ज्वेलरी फेडरेशन के साफ तौर पर मानता है कि रुपये के अवमूल्यन के लिए सिर्फ सोने का आयात ही जिम्मेदार नहीं है। सरकार सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के स्थान पर आयात कम करने के अन्य रास्ते खोजे।
लखनऊ: सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि सरकार अगर सोने की बिक्री कम करना चाहती है तो उसे आम लोगों को अपने संचित धन के बेहतर निवेश के मौके उपलब्ध कराने चाहिए।
उत्तर प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन और ज्वेल्स एंड ज्वेलरी फेडरेशन के साफ तौर पर मानता है कि रुपये के अवमूल्यन के लिए सिर्फ सोने का आयात ही जिम्मेदार नहीं है। सरकार सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के स्थान पर आयात कम करने के अन्य रास्ते खोजे।
उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र जैन और ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन के रीजनल चेयरमैन श्रेयांश कपूर का कहना है कि महज सत्रह महीने पहले सोने पर मात्र एक फीसद आयात शुल्क लागू था।
सरकार ने सोने के आयात को कम करने की कोशिश के चलते आयात शुल्क बढ़ाते-बढ़ाते इसे आज आठ फीसदी कर दिया है। इससे भारत के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में खासा अंतर आ गया है। इस अंतर के चलते ही सोने की तस्करी को बढ़ावा मिलेगा।
सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सरकार डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन पर अंकुश लगाने के लिए आयात कम ही करना चाहती है तो उसे फर्नीचर, मार्बल, सौंदर्य प्रसाधन व अन्य लग्जरी वस्तुओं के आयात में कमी लाने के प्रयास करने चाहिए।
एसोसिएशन का कहना है कि तस्कर सोने के आयात में कमी नहीं होने देंगे। उलटे होगा यह कि तस्करी बढ़ने से सोने के आयात से सरकार को मिलने वाले राजस्व में जरूर भारी कमी आ जाएगी।
एसोसिएशन के मुताबिक, भारत में लोग विवाह आदि के मौकों पर ही नहीं, अपनी छोटी बचत के निवेश के लिए भी सोना ही खरीदते हैं। अगर सरकार आम आदमी के सोने के प्रति इस आकर्षण को कम कर मांग और आयात में कमी लाना चाहती है तो उसे गोल्ड बांड, सिक्योरिटी स्कीम जैसी योजनाएं लानी चाहिए, जिनमें छोटी-छोटी बचत कर लोग उतना ही फायदा पा सकें, जितना सोना देता है।