खास बातें
- पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों के नीचे आने से जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर घटकर 9.22% पर आ गई है।
New Delhi: खाद्य वस्तुओं तथा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों के नीचे आने से जुलाई माह में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर घटकर 9.22 प्रतिशत पर आ गई है। इससे पिछले महीने यह 9.44 फीसद के स्तर पर थी। एक साल पहले यानी जुलाई, 2010 में कुल मुद्रास्फीति 9.98 प्रतिशत के स्तर पर थी। सरकार द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, मई माह की महंगाई की दर को शुरुआती 9.06 प्रतिशत से अनुमान से बढ़ाकर 9.56 प्रतिशत कर दिया गया है। जुलाई माह में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में साल दर साल आधार पर 8.19 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जून में यह आंकड़ा 8.38 फीसद का था। माह के दौरान कुल प्राथमिक उत्पादों की महंगाई की दर साल दर साल आधार पर 11.30 प्रतिशत रही, जो जून में 12.22 फीसद थी। कुल मुद्रास्फीति में प्राथमिक वस्तुओं की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत की है। हालांकि जुलाई में विनिर्मित उत्पादों के दामों में सालाना आधार पर 7.49 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। थोक मूल्य सूचकांक में विनिर्मित उत्पादों की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत की है। खास बात यह है कि इस साल फरवरी से ही विनिर्मित वस्तुओं के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। फरवरी में सालाना आधार पर विनिर्मित उत्पादों के दामों में छह प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जून में सालाना आधार पर इन उत्पादों के दाम 7.43 प्रतिशत तक बढ़े थे। सालाना आधार पर ईंधन और बिजली के दामों में जुलाई के दौरान 12.04 प्रतिशत का इजाफा हुआ। जून में यह आंकड़ा 12.85 फीसद का था। थोक मूल्य सूचकांक में इनकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत की है। गैर खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई में घटकर 15.51 प्रतिशत पर आ गई, जो जून में 18.57 फीसद थी। जुलाई माह में मुद्रास्फीति का आंकड़ा पिछले आठ माह में सबसे कम रहा है। इससे पहले नवंबर, 2010 में महंगाई की दर 8.20 प्रतिशत थी। हालांकि जुलाई में कुल मुद्रास्फीति का आंकड़ा नीचे आया है, लेकिन इसके बावजूद इस बात के आसार नहीं हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति को सख्त करने के अपने रुख में बदलाव करेगा, क्योंकि विनिर्मित उत्पादों की मूल्यवृद्धि से कोई राहत नहीं मिल पा रही है। यह लगातार आठवां महीना है जब कुल मुद्रास्फीति 9 प्रतिशत से ऊंची बनी हुई है। स्वाधीनता दिवस के मौके पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि कई बार देश में मूल्यवृद्धि की वजह बाहरी होती है। उन्होंने कहा था कि इसी कारण से सरकार द्वारा महंगाई पर अंकुश लगाने के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार महंगाई पर अंकुश के लिए कुछ नए कदम उठाने पर विचार कर रही है। मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़े केंद्रीय बैंक के चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में महंगाई की ऊंची दर के अनुमान के अनुरूप हैं। रिजर्व बैंक ने 2011-12 की मौद्रिक नीति की समीक्षा में कहा था कि वैश्विक स्तर पर जिंसों के दाम खासकर तेल कीमतों की वजह से देश में महंगाई की दर ऊंची बनी रहेगी। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि 2011-12 की पहली छमाही में औसत मुद्रास्फीति 9 प्रतिशत रहेगी। मार्च के अंत तक यह घटकर 7 प्रतिशत के आसपास आ जाएगी।