खास बातें
- अर्थव्यवस्था में नरमी का संकेत देते हुए औद्योगिक उत्पादन मार्च 2012 में शून्य से 3.5 फीसदी नीचे लुढ़क गया।
नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था में नरमी का संकेत देते हुए औद्योगिक उत्पादन मार्च 2012 में शून्य से 3.5 फीसदी नीचे लुढ़क गया। ऐसा मुख्य तौर पर विनिर्माण और पूंजीगत उत्पादों का उत्पादन शून्य से नीचे गिर जाने के कारण हुआ।
औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के जरिए आंकी जाती है और यह पिछले साल मार्च में इसमें 9.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी।
सरकारी आंकड़े के मुताबिक वित्त वर्ष 2011-12 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 2.8 फीसदी के निराशाजनक स्तर पर रही जो पिछले साल 8.2 फीसद थी। इस दौरान खनन क्षेत्र की वृद्धि दर शून्य से नीचे दो फीसद रही और विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 2.9 फीसद रही।
सूचकांक में 75 फीसदी योगदान करने वाले क्षेत्र विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर मार्च में शून्य से नीचे 4.4 फीसदी रही जबकि मार्च 2011 में 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी। खनन उत्पादन भी 1.3 फीसदी गिरा जबकि पिछले साल की समान अवधि में 0.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी।
पूंजीगत उत्पाद की वृद्धि दर शून्य से 21.3 फीसदी नीचे रही जबकि पिछले साल की समान अवधि में 14.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी। उपभोक्ता उत्पादन के उत्पादन की वृद्धि दर भी मार्च में महज 0.7 फीसदी रही जबकि पिछले साल की समान अवधि में 13.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी।
इसके अलावा उपभोक्ता टिकाउ उत्पाद खंड में मार्च के दौरान 0.2 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान 14.9 फीसदी की जोरदार वृद्धि दर्ज हुई थी।
बिजली उत्पादन में मार्च के दौरान 2.7 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई जबकि पिछले साल की समान अवधि में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई।
जहां तक उद्योग का सवाल है तो विनिर्माण क्षेत्र के 22 औद्योगिक समूह में से 10 उद्योग समूह ने मार्च के दौरान पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।