यह ख़बर 16 जून, 2013 को प्रकाशित हुई थी

संकट में है भारतीय अर्थव्यवस्था : NCAER

खास बातें

  • नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च ने कहा है, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में है। वृद्धि दर घट रही है, ऊंचे चालू खाते के घाटे, ऊंचे राजकोषीय घाटे और ऊंची मुद्रास्फीति से अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब है।’’
नई दिल्ली:

आर्थिक वृद्धि दर में नरमी, बढ़ते राजकोषीय और चालू खाते के घाटे तथा ऊंची मुद्रास्फीति से भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में है। आर्थिक शोध संस्थान एनसीएईआर के एक अध्ययन में यह बात कही गई है।

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च ने कहा है, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में है। वृद्धि दर घट रही है, ऊंचे चालू खाते के घाटे, ऊंचे राजकोषीय घाटे और ऊंची मुद्रास्फीति से अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब है।’’

दिसंबर 2012-13 में समाप्त तिमाही में देश का चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के रिकॉर्ड स्तर 6.7 प्रतिशत पर पहुंच गया। अध्ययन में कहा गया है कि तेल, कोयला एवं सोने का आयात बढ़ने की वजह से चालू खाते का घाटा बढ़ा है।
एनसीएईआर ने कहा कि ऊंचे चालू खाते के घाटे को पाटने के लिए अधिक विदेशी निवेश की जरूरत है।

इसमें कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय उतार-चढ़ाव के मद्देनजर यह एक जोखिमपूर्ण परिस्थिति है। अध्ययन में कहा गया है कि इसमें लगातार बढ़ोतरी से वृहद आर्थिक जोखिम बढ़ेंगे, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था की विदेशी भुगतान प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं।

एनसीएईआर के अध्ययन में कहा गया है कि वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने की जरूरत है, जिससे व्यापार घाटे को कम किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई क्षेत्रों में भारत का विनिर्माण अभी भी प्रतिस्पर्धापूर्ण नहीं है। अध्ययन में कहा गया है कि दीर्घकालिक कारकों पर ध्यान देने की जरूरत है। इनमें बुनियादी ढांचा, श्रम कानून और संचालन सुधार शामिल हैं।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने से विनिर्मित वस्तुओं में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

इसमें कहा गया है कि भारत को अन्य एशियाई देशों के साथ व्यापार एकीकरण को मजबूत करने के लिए अग्रसारी कदम उठाने चाहिए। अध्ययन में कहा गया है कि एशिया के साथ व्यापार और निवेश संबंधों भारत के निर्यात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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इसके साथ ही एनसीएईआर ने कहा है कि भारत को अपनी द्विपक्षीय करारों को मजबूत करने के लिए कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा उसे आसियान प्लस 6 जैसे समूहों के साथ विदेश व्यापार करारों को पूरा करना चाहिए। आसियान के बाहर के 6 देश हैं : ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड।