यह ख़बर 17 जून, 2013 को प्रकाशित हुई थी

रिजर्व बैंक की दरों में कटौती न होने से उद्योग जगत निराश

खास बातें

  • उद्योग जगत ने उम्मीद जताई है कि जरूरत होने पर रिजर्व बैंक हस्तक्षेप करेगा और इसके लिए 30 जुलाई को घोषित की जाने वाली तिमाही मौद्रिक समीक्षा का इंतजार नहीं करेगा।
नई दिल्ली:

रिजर्व बैंक द्वारा आज नीतिगत दरों में कटौती न किए जाने पर उद्योग जगत ने निराशा जताई है और कहा है कि आर्थिक वृद्धि प्रोत्साहन के लिए ब्याज दरों में कमी करने का यह उचित समय है।

उद्योग जगत ने उम्मीद जताई है कि जरूरत होने पर रिजर्व बैंक हस्तक्षेप करेगा और इसके लिए 30 जुलाई को घोषित की जाने वाली तिमाही मौद्रिक समीक्षा का इंतजार नहीं करेगा।

रिजर्व बैंक ने आज पेश मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में अपने अल्पकालिक ऋण पर ब्याज दर (रेपो दर) को 7.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। केंद्रीय बैंक ने आरक्षित नकद अनुपात (सीआरआर) को भी चार फीसदी पर बनाए रखा है।

उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, रिजर्व बैंक का नीतिगत दरों पर यथास्थिति कायम रखने का फैसला निराशाजनक है। ऐसे समय जबकि वृद्धि और मुद्रास्फीति दोनों ही मौद्रिक नीति में नरम किए जाने की ओर इशारा कर रही हैं। केंद्रीय बैंक ने सतर्कता का रख अपनाया है। सीआईआई ने हालांकि उम्मीद जताई है कि रिजर्व बैंक जरूरत होने पर अगली तिमाही समीक्षा का इंतजार न करते हुए हस्तक्षेप करेगा।
 
एसोचैम ने भी ब्याज दरों में कटौती न किए जाने के फैसले पर निराशा जताई है। एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत ने कहा, हम सिर्फ रुपये में गिरावट और इसके महंगाई पर पड़ने वाले संभावित असर के आधार पर नहीं चल सकते। मानसून के बेहतर आगमन को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है, जिससे निश्चित रूप से खाद्य आपूर्ति बढ़ेगी। इससे पिछली तीन मौद्रिक घोषणाओं में रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती की थी।

हालांकि, एक अन्य उद्योग मंडल फिक्की का मानना है कि ब्याज दरों में बदलाव न करने का रिजर्व बैंक का फैसला उम्मीद के अनुरूप है। फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, रुपये के मूल्य में आई गिरावट के मद्देनजर रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने का फैसला उम्मीद के अनुरूप है, हालांकि, किदवई ने रिजर्व बैंक से कहा कि वह हाल के सकारात्मक घटनाक्रम को ध्यान में रखकर निवेश को प्रोत्साहन के लिए जरूरी कदम उठाए।

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उन्होंने कहा कि महंगाई, नकारात्मक औद्योगिक वृद्धि दर जैसी चिंताएं अब समाप्त हो रही हैं और मानसून का प्रदर्शन भी बेहतर दिख रहा है। ऐसे में वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए अब निवेश पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।