खास बातें
- मुखर्जी ने कहा कालाधन रखने वालों की पनाहगाह देशों की सरकारों को नियमित प्रावधानों के जरिए कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करना चाहिए।
हनोई: भारत में सरकार पर विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने के लिए समाज और राजनीतिक दलों के बढ़ते दबाव के बीच वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी अपील की कि वह कालेधन की पनाहगाहों पर बैंकिंग और कर संबंधी सूचनायें उपलब्ध कराने के लिए दबाव बढ़ाए। मुखर्जी ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) गवर्नर्स संगोष्ठी में कहा कालाधन रखने वालों की पनाहगाह माने जाने वाले देशों की सरकारों को नियमित प्रावधानों के जरिए कर सूचनाओं का आदान प्रदान करना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी कहा कि वह इन देशों के असहयोगात्मक रवैये के खिलाफ उन पर दबाव बनाएं। मुखर्जी ने कहा कि कर अपवंचना और कर मामलों में धोखाधड़ी के बीच कोई फर्क नहीं होना चाहिए और न ही कर सूचनाओं के मामले में कोई रुकावट आनी चाहिए। कई देश और विशेषअधिकार वाले क्षेत्र ऐसे हैं जहां कर मामलों में धोखाधड़ी और कर अपवंचना को अलग अलग माना जाता है। ऐसा अंतर माने जाने से कर अपवंचना को बढावा मिलता है और सूचनाओं के प्रभावी आदान-प्रदान में रुकावट खड़ी होती है। विदेशों में रखी गई काली कमाई को लेकर कटघरे में खड़ी सरकार ने 11 देशों के साथ कर सूचनाओं के आदान प्रदान और 13 देशों के साथ दोहरे कराधान से बचने के समझौते किए हैं इनमें मौजूदा ऐसे समझौते के मौजूदा 10 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। फ्रांस के वित्त मंत्री क्रिस्टीने लागार्डे ने इस मौके पर कहा हमें भ्रष्टाचार और असहयोगात्मक रवैया रखने वाले देशों और क्षेत्रों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा। दुनिया के समूह 20 के देशों का लक्ष्य ही मजबूत, सतत् और संतुलित वृद्धि के लिये एक खाका तैयार करना है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली में सुधार पर भी जोर दिया।