खास बातें
- राजनीतिक गतिरोध की आशंका के साथ शुरू हुए संसद सत्र के दौरान सुधारों के आगे बढ़ने की संभावनाएं धुंधली नजर आ रही हैं। ऐसे में रुपये में आने वाले महीनों में भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
नई दिल्ली: राजनीतिक गतिरोध की आशंका के साथ शुरू हुए संसद सत्र के दौरान सुधारों के आगे बढ़ने की संभावनाएं धुंधली नजर आ रही हैं। ऐसे में रुपये में आने वाले महीनों में भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
एचएसबीसी की एक रपट में कहा गया है कि फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले 55 के स्तर पर बोला जा रहा है। रुपया तलवार की धार पर चल रहा है। यदि सुधार से जुड़े कोई फैसले वापस लिए जाते हैं तो रुपये पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और गिरावट का दबाव बनेगा। एचएसबीसी के मुताबिक, बाजारों के लिए एक प्रमुख बिंदु यह है कि सरकार बहु-ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई की अनुमति देने के अपने फैसले पर कायम रह पाती है या फिर वह विपक्ष के दबाव के आगे झुक जाती है।
रपट में कहा गया है कि यह बहस भारतीय रुपये और आर्थिक सुधार प्रक्रिया के लिए कड़ा परीक्षण होगा। यदि हाल में लिए गए सुधार के फैसले में से किसी को भी वापस लिया जाता है तो रुपये पर कमजोरी का दबाव बढ़ेगा। एक अन्य बड़ी चिंता सरकारी ऋण की रेटिंग में कमी की आशंका के बारे में है। एसएंडपी ने संकेत दिया कि अगले दो साल में रेटिंग में कमी की लगभग एक तिहाई संभावना है। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि सुधार संबंधी फैसले वापस लिए गए तो रेटिंग घटने का जोखिम बढ़ेगा।
रपट में कहा गया ‘‘रुपए के उतार-चढ़ाव की स्थिति और सुधार प्रक्रिया से जुड़ी आशंकाओं के बीच रुपए की चुनौतियां साफ हैं।’’ इस रपट के मुताबिक सरकार के लिए सुधार के एजेड़े पर कायम रहना महत्वपूर्ण है और ऐसा न होने पर मुद्रा पर दबाव बरकरार रहेगा।