एक चैनल के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि सरकार या रिजर्व बैंक ने यह सोचा है कि रुपये की कोई सीमा रेखा तय की जाए। मेरे विचार से फिलहाल, रुपया जरूरत से ज्यादा गिर चुका है। उल्लेखनीय है कि गत बृहस्पतिवार को डॉलर की तुलना में रुपया अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर 65.56 रुपये प्रति डॉलर तक गिर गया था, लेकिन शुक्रवार को वित्तमंत्री पी चिदंबरम के अनुकूल बयान के बाद यह सुधर गया और 63.20 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।
इस साल अप्रैल के अंत से अब तक रुपया 17 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। अहलूवालिया ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा किए गए उपायों का बाजार में गलत अर्थ समझा गया।
अहलूवालिया ने आगे कहा कहा कि बाजार जब मुश्किल दौर में होता है उस समय गंभीर निवेशक अधिकारियों की बातों पर ध्यान देते हैं।
उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल चालू खाते के घाटे को सीमित रखने के लिए एक उपाय के तौर इस्तेमाल करने की वकालत की। उन्होंने कहा, मेरे विचार से यदि आप जरूरत के समय इस्तेमाल नहीं करते हैं तो आपके पास कितना भी विदेशी मुद्रा का भंडार है उसका कोई मतलब नहीं है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इसे घटाकर 70 अरब डॉलर या जीडीपी के 3.7 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा है।
अहलूवालिया ने कहा कि सोने का आयात घटने की वजह से चालू वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा कम रहेगा और आर्थिक वृद्धि में नरमी की वजह से पेट्रोलियम उत्पादों की मांग भी सुस्त रहेगी।
अटकी पड़ी परियोजनाओं से निपटने के लिए निवेश से संबद्ध मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा किए गए प्रयासों पर उन्होंने कहा कि 78,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की बिजली परियोजनाओं के लिए इस महीने के अंत तक ईंधन आपूर्ति की व्यवस्था कर ली जाएगी।
कुमार मंगलम बिड़ला की अगुवाई वाले आदित्य बिड़ला समूह के इस बयान पर कि 10 अरब डॉलर मूल्य की उसकी परियोजनाएं अटकी हैं, अहलूवालिया ने कहा, हम स्पष्ट कर दें कि निवेश से संबद्ध मंत्रिमंडलीय समिति ने पहली प्राथमिकता उन बिजली परियोजनाओं को दी जो ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि आदित्य बिड़ला का मामला महत्व का नहीं है। मैं व्यक्तिगत तौर पर मानता हूं कि हमें उसे भी महत्व देना चाहिए, लेकिन यह अगले दौर के कैप्टिव बिजली संयंत्र में दिया जाएगा। उन पर अब विचार किया जा रहा है।
राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के बारे में उन्होंने कहा, अगर आप राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के प्रति गंभीर हैं और आप पाते हैं कि इसके लिए पर्याप्त राजस्व नहीं है तो आपको खर्चे में कटौती करनी होगी और कोई भी वित्त मंत्री यह कर सकता है। यह करना सुखद नहीं है, लेकिन उन्हें (वित्त मंत्री) यह करना होगा। अन्य देशों के साथ अदला-बदली की व्यवस्था पर उन्होंने कहा, यदि आप एक सामान्य देश हैं और आपको नकदी संरक्षण की दरकार है तो आप अदला-बदली व्यवस्था अपनाएंगे या फिर आईएमएफ के पास जाएंगे। हमें यह करने की जरूरत नहीं है।
खाद्य सुरक्षा विधेयक के चलते सरकारी सब्सिडी में वृद्धि की संभावनाओं पर अहलूवालिया ने कहा, यह सब्सिडी का महज एक खंड है। अगर हम पूरी सब्सिडी को नियंत्रित रखना चाहते हैं तो मुझे नहीं लगता कि आपको खाद्य सब्सिडी को इसमें गिनना चाहिए जो काफी संवेदनशील है।