अडानी समूह ने शुक्रवार को बंदरगाह पर भारी वाहनों को भेजने की योजना बनाई है.
कोच्चि: दक्षिणी भारत के तिरुवनंतपुरम में अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) के निर्माणाधीन विझिंजम मेगा पोर्ट ( Vizhinjam Port) की मुख्य सड़कों पर मछुआरे लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. ईसाई मछुआरा समुदाय द्वारा बनाए गए सेल्टर होम की वजह से मुख्य प्रवेश द्वार ब्लॉक हो गया है. इस वजह से आगे निर्माण कार्य में रुकावट आ सकती है. रॉयटर्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, यह सेल्टर लोहे की छत से बना है और करीब 1,200 वर्ग फुट में फैला हुआ है. देश के पहले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के निर्माण कार्य के बीच अगस्त के बाद से यह बाधा बनकर खड़ी है.
इस सेल्टर में लगभग 100 प्लास्टिक की कुर्सियों रखी गई हैं और इसे "अनिश्चित दिन और रात के विरोध" के नारे वाले बैनरों से पूरी तरह सजाया गया है. हालांकि, धरने में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या आमतौर पर बहुत कम होती है. लेकिन फिर भी करीब 300 पुलिस अधिकारी स्थिति की सावधानीपूर्वक निगरानी करने के लिए डंडों के साथ तैनात होते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी (BJP) और हिंदू समूहों के सदस्यों सहित कई समर्थक सड़क के उस पार अपना एक सेल्टर बनाए हुए हैं. इस परियोजना को लेकर बीजेपी का कहना है कि यह केरल (Kerala) राज्य के विकास के लिए काफी अहम है. इसलिए बीजेपी लगातार इसका समर्थन कर रही है.
केरल की शीर्ष अदालत ने कहा है कि बंदरगाह का निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ना चाहिए. हालांकि, केरल हाईकोर्ट के बार-बार आदेश देने के बावजूद पुलिस प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार नहीं है. पुलिस को इस बात का डर है कि ऐसा करने से बंदरगाह पर सामाजिक और धार्मिक तनाव बढ़ जाएगा. रॉयटर्स ने एक दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ बंदरगाह समर्थकों, पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत की.
इस परियोजना का विरोध कर रहे लोगों से लेकर मछुआरों का कहना है कि यह उनके जीवन और आजीविका के लिए खतरा पैदा कर सकता है. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार बंदरगाह के विकास को लेकर निर्माण और स्वतंत्र अध्ययन को रोकने का आदेश दे.
दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स अडानी के लिए 7,500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना इस विरोध प्रदर्शन के चलते लंबे समय से विवादों में है, जिसका कोई स्पष्ट और आसान समाधान नहीं मिला है. हालांकि, इस बीच अडानी समूह (Adani Group) ने शुक्रवार को बंदरगाह पर भारी वाहनों को भेजने की योजना बनाई है. क्योंकि इस सप्ताह अदालत ने कहा है कि वाहनों की आवाजाही को अवरुद्ध नहीं किया जाना चाहिए. इससे पहले अक्टूबर में बंदरगाह से बाहर निकलने की कोशिश करने वाले वाहनों को वापस लौटना पड़ा था.