खास बातें
- उद्योग मंडल फिक्की ने रिजर्व बैंक से आग्रह किया है कि वह मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में महत्वपूर्ण नीतिगत दरों में कटौती करे।
New Delhi: अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटने की आशंका तथा कारोबारी भरोसा डगमगाने के बीच उद्योग मंडल फिक्की ने रिजर्व बैंक से आग्रह किया है कि वह मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में महत्वपूर्ण नीतिगत दरों में कटौती करे। फिक्की का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी। फिक्की ने इकनॉमी वॉच में कहा है कि इस मौके पर ब्याज दरों में कटौती से कॉरपोरेट जगत का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी। मार्च, 2010 के बाद से केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 11 बार वृद्धि कर चुका है। इस दौरान महंगाई पर अंकुश के लिए केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में 4.75 प्रतिशत की वृद्धि की है। रिजर्व बैंक की मध्य तिमाही समीक्षा 16 सितंबर को आनी है। फिक्की ने कहा है कि 2009 की तीसरी तिमाही के बाद भारतीय कंपनियों का भरोसा सबसे निचले स्तर पर है। इसने कहा है कि यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार 2012 के लिए 4.6 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लांघ सकती है। डीईपीबी के बारे में उद्योग मंडल ने कहा है कि इस लोकप्रिय कर लाभ योजना के वापस होने से सितंबर के बाद निर्यातकों को नुकसान होगा। चालू वित्तवर्ष की अप्रैल से जुलाई की अवधि में देश का निर्यात 53.98 प्रतिशत बढ़कर 108.34 अरब डॉलर हो गया है। पिछले वित्तवर्ष की समान अवधि में यह 70.36 अरब डॉलर रहा था।