यह ख़बर 26 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

दरों में वृद्धि से विकास प्रभावित होगा : उद्योग जगत

खास बातें

  • भारतीय उद्योग जगत ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुख्य दरों में वृद्धि करने पर अपनी नाखुशी जाहिर की।
नई दिल्ली:

भारतीय उद्योग जगत ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुख्य दरों में वृद्धि करने पर अपनी नाखुशी जाहिर की। कारोबारी जगत ने एक सुर में कहा कि इसका विकास दर पर नकारात्मक असर होगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के महासचिव राजीव कुमार ने कहा, "विकास की दर अभी भी कम है। इस कदम से विकास दर पर नकारात्मक असर होगा।" उन्होंने कहा, "वर्ष 2011-12 के लिए अनुमानित आठ फीसदी विकास दर हासिल करना भी मुश्किल होगा।" फिक्की ने अपने ताजा सर्वेक्षण में मौजूदा कारोबारी साल में विकास दर के 7.9 रहने का अनुमान जताया है, जबकि सरकारी अनुमान 0.25 फीसदी के कम या अधिक के साथ नौ फीसदी है। आरबीआई ने जनवरी 2010 के बाद से लगातार 11वीं बार प्रमुख दरों में वृद्धि की घोषणा करते हुए मंगलवार को  मुख्य दरों में 50 आधार अंकों की वृद्धि की, जिसके बाद रेपो दर 7.5 फीसदी से बढ़कर आठ फीसदी और रिवर्स रेपो दर 6.5 फीसदी से बढ़कर सात फीसदी हो गया। फिक्की के महासचिव ने कहा कि आरबीआई ने महंगाई और विकास दर में से महंगाई कम रखने को अधिक वरीयता दी है। इसीलिए सम्भवत: आरबीआई ने विकास दर का अनुमान घटाकर आठ फीसदी कर दिया। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भी कहा कि आरबीआई के इस कदम से कारोबारी माहौल बिगड़ेगा। अधिकतर विश्लेषक हालांकि मुख्य दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन आरबीआई ने उनके अनुमान से आगे बढ़ते हुए 50 आधार अंकों की वृद्धि कर दी। औद्योगिक संस्थानों का मानना है कि दरों में वृद्धि करने से महंगाई कम नहीं होगी, क्योंकि यह आपूर्ति-मांग में अंतर के कारण पैदा हुई है। आरबीआई द्वारा मार्च 2010 के बाद से लगातार दरों में वृद्धि करने के बावजूद महंगाई दर घटने का नाम नहीं ले रही है। मार्च 2010 में महंगाई दर 10.4 फीसदी थी, जो आरबीआई द्वारा दरों में लगातार वृद्धि करने के बाद जून 2011 में 9.4 फीसदी दर्ज की गई है।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com