यह ख़बर 09 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

यूरो को बचाने की नई संधि से बंटा यूरोपीय संघ

खास बातें

  • यूरो को बचाने की मुहिम के तहत 23 यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के और नजदीक लाने के लिए नई संधि की ओर बढ़े हैं।
ब्रूसेल्स:

यूरो को बचाने की मुहिम के तहत 23 यूरोपीय देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के और नजदीक लाने के लिए नई संधि की ओर बढ़े हैं, पर वे इसमें ब्रिटेन तथा संघ के तीन अन्य सदस्यों को शामिल करवा पाने में विफल रहे हैं। रात भर चली मैराथन बातचीत के बाद 23 देशों ने इस नई संधि का समर्थन करने का फैसला किया है, जिसके तहत राष्ट्रीय बजट पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। इन देशों का मकसद बाजारों को यह भरोसा दिलाना है कि बढ़ते नकदी संकट के बावजूद यूरो का भविष्य है। इस संधि पर दुनिया भर की सरकारों और बाजारों की निगाह है। यूरोपीय नेताओं के समक्ष अभी भी कई तरह की बाधाएं हैं। उनके बीच इस मुद्दे पर आज एक और बैठक होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि इस संधि में किन बातों का समावेश किया जाए और किस तरह कड़े बजट नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो। वे चाहते हैं कि इसे मार्च तक लिख दिया जाए। ब्रिटेन में यूरो मुद्रा का इस्तेमाल नहीं होता। उसने इस संधि का विरोध करते हुए कहा है कि इससे उसकी राष्ट्रीय अखंडता और लंदन का प्रतिष्ठित वित्तीय सेवा उद्योग प्रभावित होगा।


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