खास बातें
- पेट्रोल की ही तरह डीज़ल के भी दाम बढ़ाने का हक तेल कंपनियों को देने का रास्ता साफ हो रहा है।
नई दिल्ली: पेट्रोल की ही तरह डीज़ल के भी दाम बढ़ाने का हक तेल कंपनियों को देने का रास्ता साफ हो रहा है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक डीज़ल के दामों से अपना काबू खत्म करने के लिए सरकार सहमत हो गई है। राहत की बात यह है कि रसोई गैस और केरोसिन के लिए फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
बीजेपी ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि सरकार डीज़ल के दाम बढ़ाने जा रही है और यह झटका आम लोगों को जल्द ही लगेगा।
लेकिन, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहना है कि इस बारे में तो फैसला पिछले साल जून में ही ले लिया गया था। दरअसल, डीज़ल के दामों को कम रखने के लिए सरकार मोटी सब्सिडी देती है।
इस साल तेल पर सब्सिडी के लिए 43580 करोड़ रुपये रखे गए हैं जिसमें से 40 हजार करोड़ तेल कंपनियों को दिए जाएंगे।
पिछले साल तेल कंपनियों को 65 हजार करोड़ रुपये दिए गए थे। इनमें से 20 हजार करोड़ तो सिर्फ जनवरी से मार्च तक दिए गए।
ये माना जाता है कि डीज़ल के दाम सीधे−सीधे महंगाई पर असर डालते हैं। सामान लाना ले जाना महंगा हो जाता है और सामान के दाम बढ़ जाते हैं। इसका असर सीधे−सीधे आम लोगों पर पड़ता है। सरकार इसीलिए अब तक फूंक−फूंक कर कदम उठाती रही है।