यह ख़बर 06 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण रखेंगे: वित्त मंत्रालय

खास बातें

  • वित्त मंत्रालय ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में राजस्व वसूली कम रहने की आशंका के बावजूद वह राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.6 प्रतिशत के दायरे में रखने का प्रयास करेगा।
New Delhi:

वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा है कि चालू वित्त वर्ष में राजस्व वसूली कम रहने की आशंका के बावजूद वह राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 प्रतिशत के दायरे में रखने का प्रयास करेगा। आर्थिक मामले विभाग में सचिव आर गोपालन ने कहा वित्त मंत्री के लिये राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखना काफी महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा है कि राजकोषीय घाटे को 4.6 प्रतिशत पर नियंत्रित रखना है। इसलिए हम सभी उसी दिशा में काम करेंगे। गोपालन सोमवा को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पालिसी के एक कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद अलग से संवाददाताओं से बात कर रहे थे। सरकारी वित्तीय स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा इस साल राजस्व वसूली की वृद्धि पिछले साल के मुकाबले कम रह सकती है। ऐसे में सरकार का प्रयास रहेगा कि खर्चे को बजट प्रावधान के दायरे में रखा जाये। सरकार समाप्त वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.7 प्रतिशत पर रखने में सफल रही है। यह वर्ष के संशोधित अनुमान 5.1 प्रतिशत से भी काफी नीचे रहा है। चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में घाटे को जीडीपी का 4.6 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार की राजस्व वसूली उसके तय अनुमान से बेहतर रहने पर राजकोषीय घाटे में संशोधित अनुमान के भी उपर 32,000 करोड़ रुपये की कमी रही। इस दौरान सरकार का राजस्व घाटा भी 3.4 प्रतिशत के बजट अनुमान से कम होकर 3.11 प्रतिशत रह गया। यह 13वें वित्त आयोग द्वारा व्यक्त 3.2 प्रतिशत के अनुमान से भी कम रहा है। वर्ष 2011-12 के लिये सरकार को राजस्व घाटा तीन प्रतिशत तक नीचे आने की उम्मीद है।


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