यह ख़बर 06 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

2जी : CBI ने मारन पर अंगुली उठाई

खास बातें

  • केन्द्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की निगाह में आ गए हैं।
नई दिल्ली:

केन्द्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की निगाह में आ गए हैं। न्यायाल की निगरानी में मामले की जांच कर रही एजेंसी, केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मारन पर चेन्नई की दूरसंचार कंपनी एयरसेल के मालिक पर कंपनी की हिस्सेदारी एक मलेशियाई कंपनी को बेचने के आरोप को पूरी गंभीरता से ले रही है। सीबीआई ने 2जी घोटाले की जांच के संबंध की स्थिति के संबंध में 71 पृष्ट की एक नयी रपट न्यायालय में पेश किया है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2004 से 2007 के दौरान जब मारन दूरसंचार मंत्री थे, उस समय एयरसेल के प्रवर्तक सी शिवशंकरन पर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी एक मलेशियाई फर्म मैक्सिस समूह को बेचने के लिए दबाव डाला गया। वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने न्यायालय में जीएस सिंघवी और एके गांगुली की पीठ के समक्ष स्थिति रिपोर्ट को पढा। हालांकि, उन्होंने मारन का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि चेन्नई के इस व्यावसायी को दो साल तक मोबाइल सेवा शुरू करने का लाईसेंस नहीं दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मारन ने मलेशियाई कंपनी का पक्ष लिया। दिसंबर 2006 में जब मलेशियाई कंपनी ने एयरसेल का अधिग्रहण कर लिया उसके बाद मलेशियाई कंपनी को मात्र छह महीने के भीतर 2जी सेवा लाईसेंस दे दिए गए। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2004 से लेकर मई 2007 तक मारन दूरसंचार मंत्री के पद पर थे। सीबीआई के वकील वेणुगोपाल ने स्थिति रिपोर्ट को पढ़ते हुये कहा एयरसेल का प्रवर्तक लाईसेंस के लिये दर दर भटकता रहा लेकिन उन्हें अपने शेयर मलेशियाई कंपनी को बेचने पर मजबूर कर दिया गया। इससे पहले एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशन, ने शीर्ष अदालत के समक्ष ऐसे दस्तावेज पेश किए थे जिनमें मारन पर मलेशिया की दूरसंचार कंपनी मैक्सिस समूह का पक्ष लेने के आरोपों को साबित किया गया था। इसी मलेशियाई कंपनी ने चेन्नई स्थिति एयरसेल को खरीदा था। एनजीओ के अनुसार मारन ने एयरसेल को यूनीफाइड एक्सेस सविर्सेज (यूएएस) लाइसेंस जारी करने में लगातार देरी की। कंपनी वर्ष 2004 से ही दूरसंचार विभाग में इसके लिये लगातार आवेदन कर रही थी, लेकिन समय समय पर बेवजह तरह तरह के मुद्दे उठाकर लाईसेंस जारी करने से इनकार किया जाता रहा। इसके बाद कंपनी के मालिक सी. शिवशंकर को आखिरकार एयरसेल को मलेशिया की मेक्सिस समूह को बेचना पड़ा। मेक्सिस समूह के मालिक प्रमुख कारोबारी टी आनंद कृष्णन हैं। एयरसेल के प्रवर्तक शिवशंकरन पिछले महीने ही सीबीआई के समक्ष पेश हुए थे और उन्होंने अपना वक्तव्य रिकार्ड कराया। एनजीओ का दावा है कि एयरसेल का अधिग्रहण जब मलेशियाई कंपनी मेक्सिस ने कर लिया उसके बाद मारन परिवार द्वारा चलाए जाने वाले सनटीवी में मैक्सिस समूह (एयरसेल) ने सन डायरेक्ट में 20 प्रतिशत इक्विटी हासिल कर भारी निवेश किया। एनजीओ के अनुसार परेशान शिवशंकरन को आखिर एयरसेल बेचना पड़ा। मार्च 2006 में मेक्सिस ने एयरसेल में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली। कंपनी को 2006 में ही एफआईपीबी मंजूरी प्राप्त हुई। 3 मार्च 2006 को एयरसेल के 14 आवेदन दूरसंचार विभाग के समक्ष लंबित थे। शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष सुनवाई में सीबीआई के वकील वेणुगोपाल ने न्यायालय से कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में धन प्रवाह और स्रोत के मामले में सीबीआई अपनी जांच 31 अगस्त तक पूरी कर लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2001 से लेकर 2008 के बीच स्पेकट्रम आवंटन मामले में बरती गई तमाम अनियमितताओं की जांच भी सीबीआई तीन महीने के भीतर सितंबर 2011 तक पूरी कर लेगी। न्यायालय ने 11 जुलाई को अगले सुनवाई तय की है।


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