सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने मामले की सुनवाई आगे टाल दी क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने 26 अप्रैल को मित्तल की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था। मित्तल ने अपने खिलाफ जारी समन को चुनौती दी थी और कहा था कि अगले आदेश तक निचली अदालत में कार्यवाही ‘स्थगित’ रहेगी।
उच्चतम न्यायालय ने रूइया और मित्तल को निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट दे दी थी और एजेंसी को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया था। मित्तल को भी सीबीआई के जवाब पर प्रतिक्रिया के लिए तीन हफ्ते का वक्त दिया गया।
मित्तल और रूइया सीबीआई की विशेष अदालत में आज उपस्थित नहीं हुए जबकि एक अन्य आरोपी एनआरआई असीम घोष को अभी तक इस मामले में समन जारी नहीं किया गया है। वह आरोपी कम्पनी हचिंसन मैक्स टेलीकॉम प्राईवेट लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक थे।
बहरहाल, पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष आज अदालत में उपस्थित हुए। वह भी इस मामले में आरोपी हैं।
दो न्यायाधीशों को मामले की सुनवाई से अलग करने के बाद उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली नई पीठ मित्तल और रूइया की याचिका पर सुनवाई कर रही है। दोनों ने निचली अदालत के समन आदेश को चुनौती दी थी।
इससे पहले मित्तल और रूइया निचली अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे और उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक, उन्होंने निजी मुचलके भरे थे। विशेष अदालत ने 19 मार्च को मित्तल, रूईया और असीम घोष को समन जारी किया था। रूइया आरोपी कम्पनियों में से एक स्टर्लिंग सेल्युलर लिमिटेड के तत्कालीन निदेशक थे। मामले में पिछले वर्ष 21 दिसम्बर को सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र में उनके नाम का जिक्र नहीं था।
तीनों के अलावा अदालत ने श्यामल घोष और तीन दूरसंचार कम्पनियों भारती सेल्युलर लिमिटेड, हचिंसन मैक्स टेलीकॉम प्राईवेट लिमिटेड (अब वोडाफोन इंडिया लिमिटेड के नाम से प्रचलित) और स्टर्लिंग सेल्युलर लिमिटेड (अब वोडाफोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड के नाम से मशहूर) को आरोपी के तौर पर समन भेजा था।
सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में दूरसंचार विभाग द्वारा अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में तीनों दूरसंचार कंपनियों का नाम आरोपी के रूप में जिक्र किया था जिससे राजस्व को कथित रूप से 846 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ था ।
उच्चतम न्यायालय में सीबीआई ने जब मित्तल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामले में जांच के दौरान उनके खिलाफ सबूत मिले हैं तो उच्चतम न्यायालय ने पूछा था कि फिर आरोपपत्र में उनके नाम का जिक्र क्यों नहीं है ।
सीबीआई ने पिछले वर्ष 21 दिसम्बर को श्यामल घोष और तीन दूरसंचार कम्पनियों भारती सेल्युलर लिमिटेड, हचिंसन मैक्स टेलीकॉम प्राईवेट लिमिटेड और स्टर्लिंग सेल्युलर लिमिटेड के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था ।
मित्तल, रूईया और असीम घोष का सीबीआई के आरोपपत्र में आरोपी के रूप में जिक्र नहीं था, विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि वह मामले का संज्ञान ले रही है और उन सहित सभी सात आरोपियों को 11 अप्रैल के लिए सम्मन जारी कर रही है ।
विशेष अदालत ने कहा था कि मित्तल, रूइया और असीम घोष ‘‘प्रथमदृष्ट्या’’ अपनी..अपनी कंपनियों के ‘‘नियंत्रणकर्ता’’ हैं जिनके खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र का आरोपपत्र दायर किया है।