खास बातें
- जमानत याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि इन कंपनियों और इनके लोग संपूर्ण स्पेक्ट्रम सौदे से प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हुए।
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में रिलायंस एडीए समूह के तीन शीर्ष अधिकारियों समेत पांच कारपोरेट दिग्गजों की जमानत याचिका पर सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति अजित भरिहोक ने सीबीआई के विशेष सरकारी वकील यूयू ललित और कंपनियों के अधिकारियों के वकील की जिरह पूरी होने के बाद जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। कंपनियों के कार्यकारियों की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ललित ने कहा कि इन कंपनियों और इनके लोग संपूर्ण स्पेक्ट्रम सौदे से प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हुए और उन्होंने स्पेक्ट्रम लाइसेंस आबंटन से लाभ लेने के लिए राजा के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने स्पेक्ट्रम आबंटन के लिए आवेदन जमा करने की तिथि को बदलकर पीछे कर दिया और स्वान टेलीकाम एवं युनिटेक लि. के पक्ष में लाइसेंसिंग नीति में बदलाव किया। ललित ने कहा कि कंपनियों के ये अधिकारी उस षड्यंत्र का हिस्सा रहे हैं जहां भारी मात्रा में धन का लेनदेन हुआ। साथ ही इन्होंने स्पेक्ट्रम हासिल करने के लिए कुछ फर्जी दस्तावेज भी पेश किए। टूजी घोटाले में गिरफ्तार किए गए रिलायंस एडीए समूह के तीन शीर्ष अधिकारियों में प्रबंध निदेशक गौतम दोषी, अध्यक्ष हरि नायर और वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेन्द्र पिपारा शामिल हैं। इनके अलावा, स्वान टेलीकाम के निदेशक विनोद गोयनका और युनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चन्द्रा को भी इस मामले में हिरासत में लिया गया है। इन पांच कारपोरेट दिग्गजों को 20 अप्रैल को हिरासत में लिया गया। इन दिग्गजों की ओर से पेश राम जेठमलानी, पूर्व एटार्नी जनरल सोली जे. सोराबजी, पूर्व अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी और वरिष्ठ वकील राजीव नायर एवं एनके कौल ने अपने अपने मुवक्किलों की जमानत के लिए दलील दी। न्यायमूर्ति भरिहोक द्वारा जेठमलाली को अपने मुवक्किल संजय चन्द्रा के लिए कुछ अतिरिक्त दलील देने से चुप कराए जाने के बाद ललित ने जिरह शुरू की। भरिहोक ने कहा, बस बहुत हो गया, पिछले कई दिनों से सुनवाई चल रही है और अगर आप चाहते हैं तो मैं मामले की सुनवाई सितंबर तक के लिए टाल दूंगा। उन्होंने कहा, यह कोई तरीका नहीं है। हर बार आप कोई बिंदु लेकर आते हैं और लंबे समय तक जिरह करते हैं जिससे सुनवाई में विलंब हो रहा है।'