खास बातें
- वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को 2-जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति को बताया कि इस मामले पर 25 मार्च का विवादास्पद नोट विभिन्न मंत्रालयों का ‘मिलाजुला प्रयास’ था ताकि उपलब्ध तथ्यों में एकरूपता रहे।
नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को 2-जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति को बताया कि इस मामले पर 25 मार्च का विवादास्पद नोट विभिन्न मंत्रालयों का ‘मिलाजुला प्रयास’ था ताकि उपलब्ध तथ्यों में एकरूपता रहे।
विवादास्पद नोट में कहा गया है कि तत्तकालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए जोर दे सकते थे। आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपालन और वित्त सचिव आर एस गुजराल पिछले सात महीने में दूसरी बार संयुक्त संसदीय समिति के सामने पेश हुए।
समझा जाता है कि उन्होंने समिति को बताया कि विवादित नोट उपलब्ध तथ्यों पर आधारित था और उसे विभिन्न मंत्रालयों के पास उपलब्ध तथ्यों में समरूपता लाने के लिए तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि आंतरिक नोट यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था कि सभी संबंधित विभागों के पास एक समान तथ्य हों और यह टू जी मुद्दे पर पृष्ठभूमि के रूप में कार्य करे।
सू़त्रों ने बताया कि गोपालन ने स्वीकार किया कि वह वित्त मंत्रालय के वरिष्ठतम अधिकारी होने के नाते इस नोट की समान जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। गोपालन ने समिति को बताया कि यह चूंकि एक मिलाजुला प्रयास था इसलिए वह इसे बनाए जाने के लिए खुद भी जिम्मेदार हैं क्योंकि प्रक्रिया में शामिल वित्त मंत्रालय में वह वरिष्ठतम अधिकारी हैं।
आज की बैठक के ज्यादातर सवाल विपक्षी पार्टियों ने ही पूछे और समिति में मौजूद संप्रग सदस्यों की बाद में बारी आएगी। कांग्रेस के एक सदस्य ने दावा किया कि वित्त मंत्रालय का अधिकारी गवाही देने के लिए पूरी तैयारी से नहीं आया था।
सूत्रों ने बताया कि जब गुरूदास दासगुप्ता ने गोपालन से पूछा कि क्या नोट तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम को नीलामी पर नहीं जोर देने के लिए आरोपी ठहराती है। समझा जाता है कि अधिकारी ने सिर्फ यह कहा कि दस्तावेज तथ्यों पर आधारित बयान है। उन्होंने आगे कुछ भी कहने से मना कर दिया। इस विषय में भाजपा के जसवंत सिंह ने जब यह पूछा कि क्या इसे वित्त मंत्री ने देखा था और क्या इसका मतलब यह निकाला जाए कि इसे प्रणव मुखर्जी की मंजूरी थी तो समझा जाता है कि गोपालन ने कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि जब गोपालन से पूछा गया कि क्या ‘देखा गया’ शब्द से उनका मतलब यह है कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने प्रपत्र को मंजूरी दी, मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि वह इस मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते।
कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्रालय यह पता लगाने में असफल रहा है कि उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर दूरसंचार मंत्रालय द्वारा ध्यान दिया गया या नहीं और इस पूरी प्रक्रिया को ‘नूरा कुश्ती’ करार दिया। वर्ष 2003 के एक कैबिनेट के फैसले में कहा गया था कि वित्त मंत्रालय और दूरसंचार मंत्रालय विचार विमर्श कर स्पेक्ट्रम के दामों का निर्धारण करेंगे।
गौरतलब है कि 25 मार्च के नोट में कहा गया था कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम टू जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पर जोर दे सकते थे।