यह ख़बर 16 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

'शेयर निवेशक मुनाफे की उम्मीदों पर रखें लगाम'

खास बातें

  • भारतीय शेयर बाजारों में फिर तेजी के दिन लौटने के संकेत मिल रहे हैं लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने निवेशकों को लाभ की उम्मीदों को सीमा में रखने की सलाह दी है।
हैदराबाद:

भारतीय शेयर बाजारों में फिर तेजी के दिन लौटने के संकेत मिल रहे हैं लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने निवेशकों को लाभ की उम्मीदों को सीमा में रखने की सलाह दी है।

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने कहा कि उम्मीदों को उतना ही रखा जाए जिससे बाजार प्रणाली में असंतुलन और वित्तीय अस्थिरता का संकट का खतरा पैदा न हो।

चक्रवर्ती ने जवाहरलाल नेहरू बैंक एवं वित्त संस्थान संस्थान में एक कार्यक्रम में कहा, ‘जो भारत मे निवेश करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें प्रतिफल की उम्मीद सीमित रखनी चाहिए चाहिए नहीं तो असंतुलन पैदा होगा और इससे और समस्याएं पैदा होंगी।’ उन्होंने कहा, ‘हर दिन सेंसेक्स आपको शेयरों में 30 फीसद का मुनाफा नहीं दे सकता। ऋण और शेयर बाजार के बीच संबंध बना रहना जरूरी है। लेकिन जब कुल मिलाकर ऋण बाजार मंदा होता है तो शेयर बाजार में भी मुनाफा कम होना स्वाभाविक है।’

देश की नकदी की स्थिति के बारे पूछे गए सवाल के जवाब में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक मौजूदा स्थिति से खुश है।

रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए मार्च 2010 से अब तक 13 बार अपनी नीतिगत ब्याज दरें बढ़ा चुका है पर पिछले महीने की नीतिगत समीक्षा में बैंक ने बैंकों के साथ अल्पकालिक नकदी के लेनदेन पर ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा।

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चक्रवर्ती ने मुद्रास्फीति और रुपये में कमजोरी के बारे में पूछे गए सवालों को यह कहते हुए टाल दिया कि आरबीआई की 24 जनवरी को होने वाली समीक्षा में इन सवालों का जवाब दिया जाएगा।