यह ख़बर 26 नवंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

तेल, अनाज नहीं, गरीबों के खातों में सीधे कैश पहुंचाने पर फैसला आज

खास बातें

  • सरकार का इरादा है कि यूआईडी कार्ड के आधार पर गरीबों की पहचान की जाए और परिवार की महिलाओं के खाते में पैसे जमा किए जाएं। हर परिवार को साल में 35 से 40 हजार रुपये मिलेंगे।
नई दिल्ली:

सप्लाई चेन में भारी धांधली और भ्रष्टाचार के चलते सरकार ने गरीबों को अब सस्ता अनाज देने की जगह कैश सब्सिडी देने का फैसला किया है। गरीबों के खातों में सीधा पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। आज शाम इस पर बनी राष्ट्रीय कमेटी की बैठक है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करने वाले हैं। इस योजना में गरीबों को अलग−अलग सब्सिडी की रकम सीधे कैश में दी जाएगी। यह पैसा सीधे उनके बैंक अकाउंट में पहुंचेगा।

सरकार का इरादा है कि यूआईडी कार्ड के आधार पर गरीबों की पहचान की जाए और परिवार की महिलाओं के खाते में पैसे जमा किए जाएं। हर परिवार को साल में 35 से 40 हजार रुपये मिलेंगे। सरकार को इस योजना पर सालाना कुल 4 लाख करोड़ खर्च करने होंगे।

सरकार का कहना है कि इस पैसे से लोग अनाज के साथ-साथ रसोई गैस, मिट्टी का तेल और खाद भी खरीद सकते हैं, लेकिन जानकार कहते हैं कि कैश सब्सिडी से गरीबों के हालात और बिगड़ेंगे। सवाल यह है कि क्या 120 करोड़ की आबादी वाले देश में आधार यानी यूआईडी कार्ड के सहारे गरीबों की पहचान हो पाएगी। अभी देश की करीब 25 फीसदी आबादी के पास ही यूआईडी हैं।

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दूसरी बड़ी शंका देश में पीडीएस यानी सरकारी अनाज बांटने की प्रणाली के खत्म होने के डर की है। कुछ जानकार इससे महंगाई बढ़ने का अंदेशा भी जता रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि सरकार अनाज खरीद में ढिलाई बरतेगी, जिससे किसानों का नुकसान हो सकता है। सवाल यह भी है कि सरकार चुनावों से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा बिल के बजाय कैश सब्सिडी की बात क्यों कर रही है।